Punjab News: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मोरिंडा म्युनिसिपल काउंसिल के प्रेसिडेंट, सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट और वाइस-प्रेसिडेंट के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने शुरुआती तौर पर माना है कि 10 जुलाई, 2026 को हुए ये चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। इसके साथ ही, कोर्ट ने रूपनगर के डिप्टी कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे अगले आदेश तक मोरिंडा म्युनिसिपल काउंसिल के प्रेसिडेंट और वाइस-प्रेसिडेंट के सभी काम संभालें।
मोरिंडा म्युनिसिपल काउंसिल के कुल 15 पार्षदों में से 9 पार्षदों ने मनदीप सिंह बाजवा के नेतृत्व में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं और सरकार द्वारा जमा किए गए कुल 12 वीडियो क्लिप देखने के बाद, जस्टिस दीपक सिबल और जस्टिस रूपिंदरजीत चहल की बेंच ने कई अहम बातें नोट कीं:
पार्षदों को मीटिंग में शामिल होने से रोका गया: वीडियो के अनुसार, दोपहर 2:40 बजे सभी 9 याचिकाकर्ता एक साथ मीटिंग वाली जगह पर पहुँचे थे।
पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती गिरफ़्तारी: दोपहर 2:58 बजे, याचिकाकर्ता नंबर 1 को पुलिस द्वारा घसीटते हुए ले जाते देखा गया। इसके अलावा, दोपहर 3:00 बजे, याचिकाकर्ता नंबर 2 को एक कमरे में बंद कर दिया गया और पुलिस अधिकारियों (इंस्पेक्टर शिविंदर सिंह और हेड कॉन्स्टेबल नवदीप सिंह) ने उसे ज़बरदस्ती रोक कर रखा, जबकि वह खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था।
बिना बहुमत के चुनाव: मीटिंग में केवल 6 नवनिर्वाचित पार्षद और चमकौर साहिब के MLA मौजूद थे, जिन्होंने सर्वसम्मति से सिर्फ़ 15 मिनट (दोपहर 3:00 से 3:15 बजे) में चुनाव कर लिया।
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प्रशासन की भूमिका पर सवाल: मीटिंग रूम के बाहर पुलिस तैनात थी और बाहर विरोध प्रदर्शन चल रहा था। हाई कोर्ट ने गौर किया कि ज़्यादातर पार्षदों के मौजूद न होने और बाहर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, कन्वीनर (SDM मोरिंडा) ने यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि बाकी पार्षद अंदर क्यों नहीं आए।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश:
कार्यवाही का रिकॉर्ड सील करना: पंजाब सरकार को आदेश दिया गया है कि वह 10 जुलाई, 2026 की बैठक के मूल लिखित रिकॉर्ड को तुरंत सील करे और उसे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सौंपे।
CFSL जांच के आदेश: मामले से जुड़े सभी 12 वीडियो क्लिप और उन डिवाइस (जिनसे वीडियो बनाए गए थे) को सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL), चंडीगढ़ भेजने का निर्देश दिया गया है। लैब हर फ्रेम की जांच करेगी और ऑडियो स्क्रिप्ट व समय की प्रमाणिकता पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
डिवाइस जमा करने की समय-सीमा: संबंधित पक्षों से कहा गया है कि वे 7 दिनों के भीतर अपने मूल डिवाइस और मालिकाना हक की जानकारी कोर्ट में जमा करें।


