Madras Highcourt : वक्फ संपत्तियों को लेकर देशभर में विवाद जारी है। इसी बीच मद्रास हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी दरगाह या मुस्लिम धार्मिक संस्थान के होने से वह अपने-आप वक्फ संपत्ति नहीं बन जाती। कोर्ट ने साफ किया कि हर धार्मिक संस्थान को वक्फ संपत्ति मानने से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
बोर्ड का अधिकार सीमित
कोर्ट ने कहा कि वक्फ बोर्ड बिना कानूनी स्टेटस तय किए किसी संपत्ति पर अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसी आधार पर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का वह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया जिसमें चेन्नई के ट्रिपलिकेन इलाके की 240 साल पुरानी दरगाह को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था।
जज की टिप्पणी
जस्टिस के. गोविंदराजन थिलाकवदी ने कहा कि सिर्फ दरगाह होने से बोर्ड को अधिकार नहीं मिल जाता। जब तक संस्थान को कानून के अनुसार वक्फ घोषित न किया जाए, बोर्ड उस पर नियंत्रण नहीं कर सकता। बोर्ड को पहले अधिकार क्षेत्र से जुड़े तथ्यों को साबित करना होगा।
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देशभर में वक्फ संपत्तियां
भारत में करीब 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां बताई जाती हैं। इनमें से लगभग 5.17 लाख संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया था। अब तक करीब 2.16 लाख संपत्तियों का वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है, जबकि 2.13 लाख का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। लगभग 80 हजार संपत्तियां प्रोसेस में हैं और ढाई से साढ़े तीन लाख संपत्तियों का पंजीकरण ही नहीं हुआ है।

