Friday, October 9, 2026
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7 महीने तक किसने रोके रखी नगर निगम की बैठक, अब 22.10 करोड़ के बजट पर घमासान के आसार

  • हर महीने होने वाली बैठक के लिए पार्षद करते रहे इंतजार, शहर के विकास कार्यों पर लगा सवालिया निशान

कविता.रोहतक : शहर की समस्याएं हर महीने बढ़ती रहीं, विकास कार्यों की जरूरत बनी रही और वार्डों में नए काम कराने की मांग भी उठती रही, लेकिन नगर निगम की सामान्य बैठक का इंतजार खत्म नहीं हुआ। अब सात महीने के लंबे अंतराल के बाद 22 अक्टूबर को इस साल की पहली बैठक तय की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बैठक हर महीने होनी चाहिए, तो आखिर सात महीने तक इसे क्यों टाला गया। क्या शहर के विकास से जुड़े फैसलों के लिए जनप्रतिनिधियों को इतने लंबे समय तक इंतजार करना जरूरी था। बैठक नहीं होने से विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने और पार्षदों की समस्याएं सदन मंन उठाने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। अब पार्षदों को अपने-अपने वार्डों के प्रस्तावित कार्यों की सूची तैयार कर 14 अक्टूबर तक भेजने को कहा गया है। लेकिन बैठक से पहले ही शहर के लिए मंजूर किए गए 22.10 करोड़ रुपये के सेंट्रलाइज्ड बजट पर कुछ पार्षदों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सात महीने बाद होने वाली बैठक केवल विकास कार्यों की सूची तक सीमित रहेगी या इसमें देरी और बजट के इस्तेमाल को लेकर भी जवाब मांगे जाएंगे, यह देखना अहम होगा।

हर महीने होनी चाहिए बैठक

नगर निगम की बैठकें शहर के विकास से जुड़े फैसले लेने, पार्षदों की समस्याएं सुनने और विभिन्न वार्डों में जरूरी कामों को आगे बढ़ाने का प्रमुख मंच होती हैं। जब बैठक हर महीने होने की व्यवस्था है, तो सात महीने तक सामान्य बैठक नहीं होने का कारण सामने आना चाहिए। आखिर ऐसा क्या हुआ कि बैठक लगातार टलती रही। क्या प्रशासनिक अड़चनें थीं, एजेंडा तैयार नहीं हो पाया या कोई दूसरी वजह रही। इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। बैठक में देरी केवल तारीख आगे बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि इससे जनप्रतिनिधियों को अपने वार्डों के मुद्दे उठाने और विकास कार्यों पर सामूहिक चर्चा करने का अवसर भी नहीं मिल पाता। नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि बैठक नहीं होने के पीछे क्या परिस्थितियां रहीं और भविष्य में नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।

शहर की समस्याएं अपनी जगह, फैसलों के लिए सदन का इंतजार

शहर में सड़क, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार सामने आते रहते हैं। वार्ड पार्षद अपने क्षेत्र की समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं और सामान्य बैठक में इन मुद्दों को उठाकर संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दिलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बैठक लंबे समय तक नहीं होने से सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक चर्चा कब हुई। हालांकि, बैठक नहीं होने से हर विकास कार्य रुका रहा, ऐसा कहना सही नहीं होगा, क्योंकि कई कार्य प्रशासनिक स्तर पर भी आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन नियमित बैठकें नहीं होने से पार्षदों को एक मंच पर अपनी बात रखने, अधिकारियों से जवाब मांगने और प्रस्तावों पर चर्चा करने का अवसर जरूर प्रभावित होता है। सात महीने के अंतराल के बाद अब होने वाली बैठक में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस दौरान शहर के विकास से जुड़े कितने काम आगे बढ़े और किन प्रस्तावों पर निर्णय लंबित हैं।

14 अक्टूबर तक प्रस्ताव तैयार करें

22 अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले पार्षदों को अपने-अपने वार्डों में प्रस्तावित विकास कार्यों की सूची तैयार कर 14 अक्टूबर तक भेजने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य बैठक में वार्डों की जरूरतों और प्रस्तावित कार्यों पर चर्चा के लिए आधार तैयार करना है। लेकिन सवाल यह भी है कि सात महीने बाद होने वाली बैठक में केवल नए प्रस्तावों पर ही बात होगी या पुराने लंबित मुद्दों की भी समीक्षा की जाएगी। पार्षदों के लिए जरूरी होगा कि वे अपने वार्ड की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करें और उन कार्यों का ब्योरा भी रखें, जिनकी मांग पहले से उठाई जा रही है।

22.10 करोड़ के सेंट्रलाइज्ड बजट पर पहले ही उठने लगे सवाल

बैठक से पहले ही शहर के लिए प्रस्तावित 22.10 करोड़ रुपये के सेंट्रलाइज्ड बजट को लेकर कुछ पार्षदों की आपत्तियां सामने आने लगी हैं। बजट को लेकर उठ रहे सवाल बैठक के माहौल को और गरमा सकते हैं। सेंट्रलाइज्ड बजट का उद्देश्य शहर के लिए जरूरी कार्यों को एक साझा योजना के तहत आगे बढ़ाना हो सकता है, लेकिन इसके आवंटन, प्राथमिकताओं और खर्च की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है।

क्या जवाबदेही भी तय होगी

22 अक्टूबर की बैठक नगर निगम के लिए केवल नियमित कार्यवाही पूरी करने का अवसर नहीं होगी, बल्कि पिछले सात महीनों के दौरान बैठक नहीं होने और विकास से जुड़े फैसलों की स्थिति स्पष्ट करने का मौका भी होगी। पार्षदों को अपने वार्डों के प्रस्ताव रखने का अवसर मिलेगा, वहीं बजट से जुड़े सवालों पर भी चर्चा होने की संभावना है। लेकिन बैठक का असली महत्व तभी होगा, जब इसमें केवल आरोप-प्रत्यारोप न हों, बल्कि ठोस निर्णय लिए जाएं। नगर निगम को यह बताना चाहिए कि बैठकें नियमित क्यों नहीं हुईं, विकास कार्यों की समीक्षा कैसे की जाएगी और प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिलने के बाद पूरा करने की समयसीमा क्या होगी।

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