हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा , इसके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर एक वार्षिक ‘साथ’ (SAATH — Support & Awareness for Adolescents Through Parents) गतिविधि कैलेंडर तैयार किया जाएगा।
आरती सिंह राव ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से ‘साथ’ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। यह एक राज्यव्यापी कार्यक्रम है जो स्कूलों को माता-पिता, शिक्षकों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच एक नियमित बैठक स्थल में बदल देगा। स्कूलों में आयोजित होने वाले मासिक सत्रों के माध्यम से, 10 से 19 वर्ष की आयु (कक्षा 6वीं से 12वीं) के किशोरों के माता-पिता और अभिभावक भावनात्मक तनाव के शुरुआती लक्षणों को पहचानना, अपने बच्चों से खुलकर बात करना और मदद के लिए सही जगह से संपर्क करना सीखेंगे। किसी भी समस्याग्रस्त बच्चे को एक स्पष्ट प्रक्रिया के तहत सहायता दी जाएगी: शिक्षक या माता-पिता से स्कूल काउंसलर, फिर सीएचसी (CHC), किशोर स्वास्थ्य या आरबीएसके (RBSK) सेवाओं तक, और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ देखभाल तक — जहाँ हर चरण में फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर. एस. ढिल्लों ने इस बारे में आगे जानकारी देते हुए बताया कि किशोरावस्था अपने साथ परीक्षा का दबाव, सहपाठियों के साथ मनमुटाव, बुलिंग (चिढ़ाना या डराना), डिजिटल एक्सपोजर और कुछ मामलों में तंबाकू, शराब या नशीली दवाओं का शुरुआती सेवन लेकर आती है। इनमें से अधिकांश समस्याएं सबसे पहले घर पर दिखाई देती हैं। फिर भी माता-पिता अक्सर इस बात पर विश्वसनीय जानकारी पाने में पीछे रह जाते हैं कि क्या सामान्य है और किस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। ‘साथ’ कार्यक्रम इसी अंतर को खत्म करने का प्रयास करता है। इसके सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक तंदुरुस्ती, बुलिंग, हिंसा, नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिम और कब तथा कैसे मदद ली जाए, जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसमें व्यावहारिक बातों पर जोर दिया गया है कि बिना किसी पूर्वाग्रह के बच्चों की बात कैसे सुनें, बातचीत का जरिया हमेशा कैसे खुला रखें और किन चेतावनी संकेतों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. ढिल्लों ने आगे कहा कि हमारे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, और न ही यह केवल स्कूलों या अस्पतालों की जिम्मेदारी हो सकती है। बच्चे में जब भी कोई बदलाव आता है, तो माता-पिता सबसे पहले उसे पहचानते हैं, और ‘साथ’ के माध्यम से हम उन्हें सुनने, समझने और समय पर कदम उठाने के लिए सक्षम बनाना चाहते हैं। माता-पिता, शिक्षकों और हमारी स्वास्थ्य टीमों को एक मंच पर लाकर, हम परिवार से लेकर स्कूल और क्लिनिक तक देखभाल की एक निरंतर श्रृंखला बना रहे हैं। हरियाणा में किसी भी माता-पिता को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें अपने बच्चे की समस्याओं का सामना अकेले करना पड़ रहा है। सहायता उपलब्ध है, और टेली-मानस 14416 केवल एक कॉल दूर है।
डॉ. ढिल्लों ने यह भी बताया कि प्रत्येक भागीदार स्कूल नामित स्वास्थ्य और शिक्षा नोडल व्यक्तियों के साथ एक वार्षिक ‘साथ’ गतिविधि कैलेंडर तैयार करेगा। प्रत्येक सत्र का संचालन एक स्कूल नोडल व्यक्ति, एक प्रशिक्षित सूत्रधार (फैसिलिटेटर) और एक संबद्ध किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लिनिक – एएफएचसी (मित्रता क्लिनिक) द्वारा किया जाएगा। माता-पिता को स्कूल के मौजूदा माध्यमों से आमंत्रित किया जाएगा, जिसमें पहला निमंत्रण 7-10 दिन पहले और फिर तिथि के करीब रिमाइंडर भेजा जाएगा। निमंत्रण विषय-आधारित और सामान्य होंगे — उदाहरण के लिए, किशोरों में तनाव और भावनात्मक परिवर्तनों पर एक सत्र। किसी भी माता-पिता को केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए यह नहीं कहा जाएगा कि उनके बच्चे को कोई समस्या है। इसका उद्देश्य इन चर्चाओं को सामान्य बनाना है, न कि बच्चों पर कोई ठप्पा (लेबल) लगाना।

