- वायरल वीडियो के बाद उठे बड़े सवाल
- PGIMS परिसर का वीडियो बना चिंता का कारण
कविता.रोहतक: रोहतक में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अब गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप लेती दिखाई दे रही है। शराब के बाद अब सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर चिट्टा और कथित जॉम्बी ड्रग, चिंता का नया विषय बन गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक नशे की हालत में ठीक से खड़ा तक नहीं हो पा रहा। वीडियो के पीछे PGIMS परिसर जैसा दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब का है।
यदि वीडियो का दावा सही साबित होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि शहर में नशे के नेटवर्क के फैलने का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंथेटिक ड्रग्स युवाओं के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद गंभीर असर डालते हैं और समय रहते इन पर रोक नहीं लगी तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
क्या होता है चिट्टा
चिट्टा आम बोलचाल में हेरोइन या उससे मिलते-जुलते सिंथेटिक ओपिओइड नशे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। यह सफेद पाउडर जैसा होता है और बेहद तेजी से लत लगा सकता है।
क्या है जॉम्बी ड्रग
जॉम्बी ड्रग कोई एक निश्चित ड्रग का आधिकारिक नाम नहीं है। यह शब्द आमतौर पर ऐसे बेहद खतरनाक सिंथेटिक नशों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो व्यक्ति को लगभग बेहोशी जैसी अवस्था में पहुंचा देते हैं। कई देशों में यह शब्द जाइलाजीन या उसके ओपिओइड मिश्रणों के लिए भी इस्तेमाल होता है। ऐसे नशे करने वाला व्यक्ति लंबे समय तक एक ही मुद्रा में खड़ा रह सकता है, शरीर पर नियंत्रण खो देता है और उसकी प्रतिक्रिया बेहद धीमी हो जाती है।
शरीर पर क्या असर पड़ता है
- शरीर सुन्न पड़ने लगता है।
- चलने और संतुलन बनाने की क्षमता खत्म होने लगती है।
- सांस लेने की गति धीमी हो सकती है।
- बेहोशी या कोमा का खतरा।
- ओवरडोज से मौत तक हो सकती है।
- लंबे समय तक इस्तेमाल से मस्तिष्क, हृदय और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
कौन फैला रहा ‘जॉम्बी ड्रग’
रोहतक में कथित ‘जॉम्बी ड्रग’ से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि शहर में इस तरह का नशा पहुंच चुका है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसकी सप्लाई कौन कर रहा है और इसका नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है? क्या यह नशा बड़े गिरोहों के जरिए युवाओं तक पहुंच रहा है या स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री हो रही है? पुलिस और अन्य एजेंसियों के सामने अब यह चुनौती है कि वे इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करें और यह पता लगाएं कि आखिर शहर में इस खतरनाक नशे की एंट्री कैसे हुई।
युवाओं के लिए क्यों बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सिंथेटिक ड्रग्स की लत बहुत तेजी से लगती है। शुरुआत अक्सर दोस्तों के दबाव, शौक या तनाव से होती है, लेकिन कुछ ही समय में व्यक्ति पूरी तरह नशे पर निर्भर हो सकता है। इसके बाद पढ़ाई, नौकरी, परिवार और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ता है।
पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती
नशे के बढ़ते नेटवर्क को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। स्कूल, कॉलेज, परिवार, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों को भी मिलकर जागरूकता अभियान चलाने होंगे। यदि शहर में सिंथेटिक ड्रग्स की उपलब्धता बढ़ रही है, तो इसकी जांच और तस्करी पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
क्या करें अभिभावक
- बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव पर ध्यान दें।
- देर रात बाहर रहने, पढ़ाई से दूरी और नए संदिग्ध दोस्तों पर नजर रखें।
- नशे की आशंका होने पर डांटने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक या नशा मुक्ति केंद्र की मदद लें।
- बच्चों से नियमित संवाद बनाए रखें।


