Tuesday, June 23, 2026
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MSME सेक्टर को RBI की बड़ी राहत, TReDS नियमों में बदलाव से बढ़ेगी फाइनेंसिंग

MSME: भारतीय रिजर्व बैंक ने TReDS प्लेटफॉर्म से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका मकसद MSME सेक्टर को अधिक लिक्विडिटी और आसान क्रेडिट उपलब्ध कराना है। अब फाइनेंसरों को एक्सपोजर पर क्रेडिट गारंटी कवर लेने की अनुमति होगी, जिससे उनका जोखिम घटेगा और छोटे कारोबारियों को ज्यादा फाइनेंस विकल्प मिलेंगे।

TReDS क्या है
यह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जहां MSME अपने बकाया इनवॉइस को डिस्काउंट पर बेचकर तुरंत वर्किंग कैपिटल हासिल कर सकते हैं। इससे कैश फ्लो की समस्या कम होती है।

नए बदलाव
– फाइनेंसर अब गवर्नमेंट समर्थित गारंटी ट्रस्ट से कवर ले सकेंगे
– ऐसे ट्रस्ट को TReDS प्लेटफॉर्म पर पार्टिसिपेंट माना जाएगा
– MSME ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया आसान की गई है
– TReDS ऑपरेटर्स के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ ₹25 करोड़ तय किया गया है
– मौजूदा प्लेटफॉर्म्स को 31 मार्च 2028 तक नए नियमों का पालन करना होगा

अतिरिक्त प्रावधान
– फाइनेंसर अब इंश्योरेंस कवर भी ले सकते हैं, लेकिन इसका खर्च MSME पर नहीं डाला जाएगा
– इनवॉइस री-डिस्काउंटिंग और ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी, जिससे सेकेंडरी मार्केट विकसित होगा
– सभी रिसीवेबल्स का CERSAI रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी

MSME को फायदा
– तेज और आसान वर्किंग कैपिटल
– कम क्रेडिट रिस्क
– बेहतर कैश फ्लो
– ज्यादा फाइनेंसिंग विकल्प

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