World Bank report: वर्ल्ड बैंक ने जून 2026 में जारी अपनी *ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स* रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.6% रहने का अनुमान है। यह FY26 की अनुमानित 7.7% ग्रोथ दर से कम है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की ऊँची कीमतें उत्पादन लागत को बढ़ाएँगी। इसका सीधा असर निजी उपभोग और घरेलू मांग पर पड़ सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी हो सकती है।
हरदीप सिंह मुंडियां ने 48 ज़िला सिस्टम मैनेजरों और सहायक सिस्टम मैनेजरों को नियुक्ति पत्र सौंपे
संभावित असर
ऊर्जा कीमतें: महंगे ईंधन से परिवहन और उद्योगों की लागत बढ़ेगी।
उपभोक्ता दबाव: महंगाई का असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, जिससे खपत घट सकती है।
उद्योगों पर असर: उत्पादन महंगा होने से कंपनियों की लाभप्रदता कम हो सकती है।
वैश्विक तनाव: पश्चिम एशिया में अस्थिरता से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा है।
वर्ल्ड बैंक का दृष्टिकोण
संस्था का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगी, लेकिन ऊर्जा संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण विकास दर पर दबाव रहेगा।

