Thursday, June 11, 2026
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Punjab News: पंजाब को मिले विशेष श्रेणी का दर्जा और सीमावर्ती इलाकों के लिए विशेष पैकेज

Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के सामने पंजाब के लंबे समय से लंबित मुद्दों को मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों के पुनरुद्धार के लिए एक विशेष पैकेज की मांग की। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि नीति आयोग पंजाब को पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर 90:10 की फंडिंग के साथ ‘विशेष श्रेणी का दर्जा’ (Special Category Status) दे।

बैठक को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक सीमावर्ती राज्य के रूप में पंजाब के सामने आने वाली असाधारण सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर राज्य का पक्ष रखा और कहा कि राज्य की आकांक्षाएं और उम्मीदें ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप हैं।

एक प्रमुख सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब विशेष सहायता का हकदार है

पंजाब के सामने आने वाली अनूठी चुनौतियों को रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब एक प्रमुख राज्य है जिसकी पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है। राज्य एक गंभीर और बहुआयामी संकट का सामना कर रहा है, जिसमें लगातार सीमा-पार आतंकवाद और ड्रोन के माध्यम से हेरोइन व हथियारों की तस्करी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप युवाओं में नशीली दवाओं की गंभीर समस्या और संगठित अपराध बढ़े हैं, साथ ही BSF की निगरानी में कंटीले तारों और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच खेती करने वाले किसानों को रोजमर्रा की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब ने बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खामियाजा भुगता है, जिससे 2,300 से अधिक गांव प्रभावित हुए और लगभग 12,905 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पूरे देश ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पंजाब के निवासियों द्वारा झेली गई तबाही को देखा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित घनी आबादी वाले गांव और कस्बे देश के अन्य हिस्सों में हुए आर्थिक विकास में पीछे रह गए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों की अनिश्चितता और जोखिम के परिणामस्वरूप, सीमावर्ती जिलों में निवेश न के बराबर रहा है और कई मामलों में तो पूंजी बाहर चली गई है तथा उद्योग बंद हो गए हैं या दूसरी जगहों पर चले गए हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि पंजाब हमारे दुश्मन पड़ोसी के खिलाफ भारत के लिए एक ढाल के रूप में खड़ा है, लेकिन भारत सरकार द्वारा राज्य और इसके सीमावर्ती इलाकों को दी गई सहायता बहुत ही अपर्याप्त रही है।” विकास कार्यों में अंतर की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के केवल 107 गांवों को हाल ही में शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट विलेज-II’ कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जबकि सीमा के ठीक बगल में 2,000 से ज़्यादा गांव और कस्बे स्थित हैं।”

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केंद्र को पंजाब की जायज़ और लंबे समय से लंबित मांगों को स्वीकार करना चाहिए

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा को मज़बूत करने और राज्य के सामने मौजूद कई तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की बार-बार अपील की है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित बनाने, उसे भविष्य के हिसाब से मज़बूत करने और पंजाब के सामने मौजूद कई तरह के संकटों को हल करने के लिए, हमने कई मौकों पर केंद्र सरकार के सामने ज़रूरी मांगें रखी हैं। हालांकि, केंद्र ने कोई उचित जवाब नहीं दिया है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है।”

मुख्यमंत्री ने फिर से कहा कि मई 2025 में गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान उठाई गई मांगों और मौजूदा बैठक में रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अनुरोध है कि गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान मेरे द्वारा उठाई गई और आज फिर से दोहराई गई पंजाब के लोगों की जायज़ मांगों को स्वीकार किया जाए।”

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