- एआई आधारित शिक्षण, वैश्विक रैंकिंग और शोध पर फोकस, मुख्यमंत्री सैनी ने उच्च शिक्षा विभाग को दिए स्पष्ट निर्देश
चंडीगढ़: हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा सिविल सचिवालय में उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा ‘हरियाणा विजन-2047’ आगामी पांच वर्षों के रोडमैप एवं कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में उच्च शिक्षा को अधिक आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए चल रही योजनाओं, बजट घोषणाओं तथा मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक एस. नारायणन, मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
बैठक में अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को बताया गया कि राज्य के 22 मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों को स्वायत्त संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें आधुनिक आधारभूत ढांचे, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन कॉलेज भवनों और शैक्षणिक परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की शीर्ष 150 संस्थाओं में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग, छात्र विनिमय कार्यक्रम, शोध गतिविधियों और पेटेंट संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में सुधार, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में ‘ऑटोनॉमस एआई डिजिटल कॉलेज’ की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पंचकूला और गुरुग्राम में स्थापित किए जाने वाले ये संस्थान एआई आधारित आधुनिक शिक्षण प्रणाली पर कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है। बैठक में बताया गया कि सरकारी महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर छात्राओं की ट्यूशन फीस माफ की गई है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट पर विशेष निगरानी रखने तथा उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक कारणों से कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे।
अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 50 हजार रुपये तक) तथा 10 करोड़ रुपये के ‘उच्च शिक्षा गुणवत्ता एवं अनुसंधान कोष’ की स्थापना की जा रही है। साथ ही एनसीसी, एनएसएस और खेल गतिविधियों को एकेडमिक क्रेडिट बैंक से जोड़ने तथा इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट के लिए एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है।
बैठक में विभिन्न मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए रेवाड़ी, नारनौल और अन्य क्षेत्रों में चल रही शैक्षणिक अवसंरचना परियोजनाओं की जानकारी दी गई। वहीं कैरू स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में विज्ञान संकाय की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं तथा रामशरण माजरा में नया राजकीय महाविद्यालय आगामी सत्र से संचालित होगा।
मुख्यमंत्री ने ‘अव्वल बालिका योजना’ के अंतर्गत मेधावी छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा उनका समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए।

