Wednesday, June 10, 2026
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गरिमा टाइम्स ने पहले ही चेताया था, फिर भी नहीं जागा सिस्टम, डी-पार्क अग्निकांड में गईं तीन जान

रोहतक: डी-पार्क स्थित जूते के शोरूम में मंगलवार को हुए भीषण अग्निकांड ने सिर्फ 10 दुकानों को ही नहीं जलाया, बल्कि रोहतक के दमकल तंत्र की हकीकत भी सामने ला दी। आग में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और आग पर काबू पाने के लिए सात जिलों से फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस खतरे को गरिमा टाइम्स ने 27 मई को ही प्रमुखता से उठाया था, उस पर न प्रशासन ने ध्यान दिया और न ही सरकार ने। करीब दो सप्ताह पहले प्रकाशित रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया था कि रोहतक का फायर विभाग जर्जर गाड़ियों, खाली पदों और पुराने संसाधनों के सहारे चल रहा है। चेतावनी दी गई थी कि यदि किसी दिन बड़ा औद्योगिक या व्यावसायिक अग्निकांड हुआ तो हालात संभालना मुश्किल हो सकता है। मंगलवार को डी-पार्क में जो कुछ हुआ, उसने उस आशंका को वास्तविकता में बदल दिया।

https://garimatimes.in/rohtak-fire-department-is-running-on-dilapidated-fire-engines-vacant-posts-and-outdated-resources/

27 मई को चेताया था, 10 जून को सामने आ गया खतरा
गरिमा टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जिले की लगभग 12 लाख आबादी की सुरक्षा ऐसे फायर सिस्टम के भरोसे है, जिसे पिछले करीब 12 वर्षों से नई दमकल गाड़ियां नहीं मिलीं। कई वाहन तकनीकी रूप से कमजोर हो चुके हैं और विभाग में स्टाफ की भी भारी कमी है। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया था कि यदि एक साथ कई स्थानों पर आग लग जाए तो विभाग क्या करेगा। डी-पार्क हादसे ने उसी सवाल को और गंभीर बना दिया है।

एसी में धमाका और मिनटों में फैल गई तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर करीब पौने दो बजे शोरूम की पहली मंजिल से धुआं उठता दिखाई दिया। कर्मचारियों ने शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान एसी के कंप्रेसर में तेज धमाका हुआ और आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जूते, पैकिंग सामग्री और अन्य ज्वलनशील सामान के कारण लपटें तेजी से फैलीं और देखते ही देखते आसपास की करीब 10 दुकानें चपेट में आ गईं। घटना के दौरान तीन लोग अंदर फंस गए। देर शाम एनडीआरएफ ने मलबे से सौरभ उर्फ रोहित (19), अमन (38) और कपिल (50) के शव बरामद किए।

फायर ब्रिगेड देर से क्यों पहुंची, जवाब कौन देगा

इस हादसे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा दमकल वाहनों की देरी से पहुंचने को लेकर हो रही है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि आग लगने के बाद काफी देर तक प्रभावी राहत नहीं मिल सकी। लोकसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी आरोप लगाया कि पहली दमकल गाड़ी रोहतक की बजाय सांपला से पहुंची। उन्होंने कहा कि गाड़ियों के देरी से पहुंचने की जांच कराई जाएगी। अब सवाल उठ रहे हैं कि शहर के बीचों-बीच आग लगने के बावजूद तत्काल प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिल सकी। क्या पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं थे। क्या संसाधनों की कमी ने राहत कार्य को प्रभावित किया। प्रशासन को इन सवालों के स्पष्ट जवाब देने होंगे।

सात जिलों की दमकल लगी, तब जाकर काबू हुई आग
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल रोहतक का दमकल तंत्र इसे नियंत्रित नहीं कर सका। आग बुझाने के लिए सात जिलों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलानी पड़ीं। कई घंटों तक दमकल कर्मी और एनडीआरएफ टीम राहत कार्य में जुटी रही। दुकानों की पिछली दीवारें तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि तेजी से बढ़ते शहर के मुकाबले फायर इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी बहुत पीछे है।

बढ़ता शहर, लेकिन फायर सिस्टम वहीं का वहीं
रोहतक में नई कॉलोनियां, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान लगातार बढ़ रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों की संख्या भी पहले से कहीं अधिक है। इसके बावजूद फायर विभाग के संसाधनों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। जानकारों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में शहर को अधिक दमकल वाहनों, हाई-राइज फायर फाइटिंग उपकरणों, आधुनिक रेस्क्यू सिस्टम और अतिरिक्त प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत है। यदि अभी भी व्यवस्था को अपडेट नहीं किया गया तो भविष्य में और बड़े हादसे सामने आ सकते हैं।

एसी इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
डी-पार्क हादसे में एसी कंप्रेसर ब्लास्ट की आशंका सामने आने के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। एसी की नियमित सर्विस कराना बेहद जरूरी है। पुराने या बार-बार खराब होने वाले एसी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिजली के ढीले कनेक्शन, ओवरलोडेड वायरिंग और लोकल गुणवत्ता वाले तार आग का बड़ा कारण बन सकते हैं। शोरूम, गोदाम और दुकानों में एसी के आसपास ज्वलनशील सामान नहीं रखना चाहिए। हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान में फायर एक्सटिंग्विशर और इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी अनिवार्य होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख, 10-10 लाख सहायता का किया ऐलान
रोहतक अग्निकांड पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। हादसे में घायल लोगों को 2-2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। सरकार ने सभी घायलों का सरकारी अस्पतालों में निशुल्क इलाज कराने का निर्णय लिया है। साथ ही उपायुक्त रोहतक को नुकसान का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल
तीन लोगों की जान चली गई। दस दुकानें जल गईं। सात जिलों की दमकल बुलानी पड़ी। ऐसे में अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं है, बल्कि उस चेतावनी का भी है जिसे समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। जब गरिमा टाइम्स ने 27 मई को ही फायर सिस्टम की कमजोरियां उजागर कर दी थीं, तब विभाग को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए। दमकल की नई गाड़ियां क्यों नहीं खरीदी गईं। खाली पद क्यों नहीं भरे जा रहे।

और सबसे महत्वपूर्ण है कि क्या तीन जानें जाने के बाद अब व्यवस्था जागेगी या अगली त्रासदी का इंतजार होगा?

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