कविता. रोहतक
भीषण गर्मी के साथ आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन आग से लड़ने वाला फायर विभाग खुद संसाधनों की आग में झुलस रहा है। जिले की करीब 12 लाख आबादी की सुरक्षा का जिम्मा ऐसे विभाग पर है, जिसके पास न पर्याप्त आधुनिक वाहन हैं, न सुरक्षा उपकरण और न ही पूरा स्टाफ। कई दमकल गाड़ियां उम्र पूरी कर चुकी हैं, जबकि कर्मचारियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा किट के ही आग के बीच उतरना पड़ रहा है।
शहर से लेकर गांवों तक बढ़ते औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्र के बावजूद विभाग वर्षों पुरानी व्यवस्था पर टिका हुआ है। सवाल यह है कि यदि किसी दिन बड़ा औद्योगिक हादसा या एक साथ कई स्थानों पर आग लग जाए, तो क्या विभाग हालात संभाल पाएगा।
फायर विभाग के बेड़े में शामिल कई वाहन अब तकनीकी रूप से कमजोर हो चुके हैं। विभाग को पिछले करीब 12 वर्षों में नई दमकल गाड़ियां नहीं मिल पाई हैं। कई गाड़ियों में बार-बार खराबी आने की शिकायत रहती है। गर्मी के दिनों में लगातार घटनाओं के बीच इन्हीं पुरानी गाड़ियों के भरोसे पूरे जिले में राहत कार्य चलाया जा रहा है।
फायरमैन के पास नहीं पूरा सुरक्षा कवच
आग बुझाने के दौरान जहरीला धुआं, गैस और तेज लपटें सबसे बड़ा खतरा होती हैं, लेकिन कई कर्मचारियों के पास आधुनिक फायर सूट, ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क और हीट-प्रूफ हेलमेट तक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। कई बार कर्मचारी साधारण यूनिफॉर्म में ही आग बुझाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इससे उनकी जान पर लगातार खतरा बना रहता है।
88 कर्मचारियों पर पूरे जिले की जिम्मेदारी
फायर विभाग में वर्षों से खाली पड़े पद नहीं भरे गए हैं। मौजूदा समय में सीमित कर्मचारी पूरे जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शहर के अलावा बहादुरगढ़ के कुछ इलाकों जो रोहतक के नजदीक हैं, सांपला, महम, कलानौर और ग्रामीण इलाकों में भी आग बुझाने के लिए यही टीम पहुंचती है। एक साथ कई जगह आग लगने की स्थिति में विभाग पर भारी दबाव बन जाता है।
बढ़ती आबादी, लेकिन संसाधन वहीं के वहीं
रोहतक जिले की आबादी लगातार बढ़ रही है। नई कॉलोनियां, उद्योग और व्यावसायिक संस्थान तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन फायर विभाग के संसाधनों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। यदि समय रहते नई गाड़ियां, आधुनिक उपकरण और अतिरिक्त स्टाफ नहीं मिला तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बड़े हादसे से पहले जागने की जरूरत
फायर विभाग केवल आग बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि आपदा के समय सबसे पहली सुरक्षा लाइन होता है। ऐसे में विभाग को आधुनिक तकनीक, पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षा संसाधनों से मजबूत करना जरूरी है। वरना किसी बड़े हादसे के बाद सिर्फ अफसोस ही हाथ लगेगा।

