कविता.रोहतक : जिले में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। शहर से लेकर गांवों तक लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। जेएलएन फीडर में पानी की सप्लाई बेहद कम होने के कारण कई कॉलोनियों और गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
सिंचाई विभाग का कहना है कि मंगलवार सुबह मूनक हेड से पानी छोड़ा गया है और बुधवार रात तक नहर में पानी पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद हालात में कुछ सुधार हो सकता है।
जरूरत से बेहद कम पानी मिलने से बिगड़े हालात
जेएलएन फीडर की क्षमता करीब 3500 क्यूसेक बताई जा रही है, लेकिन फिलहाल केवल 500 से 700 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया है। इतनी कम मात्रा में पानी मिलने से शहर के कई हिस्सों में सप्लाई प्रभावित हो गई है। सामान्य दिनों में जहां लोगों को रोजाना पानी मिल जाता था, वहीं अब कई इलाकों में कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।
खेड़ी साध, खरावड़ समेत कई गांवों में पेयजल संकट गहराया
पानी की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। खेड़ी साध, खरावड़ और आसपास के कई गांवों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों अमित, महिपाल, आयुष, सविता और बबीता आदि का कहना है कि घरों में पीने तक का पानी नहीं बच रहा और लोगों को दूर-दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है।
भाजपा पार्षदों ने एसडीओ कार्यालय पर दिया था धरना
मंगलवार को पानी की किल्लत को लेकर भाजपा पार्षदों ने जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ कार्यालय पर धरना दिया था। धरने में कपिल नागपाल, सुमित नांदल, सुरेश, प्रवीण कौशिक सहित कई पार्षद और स्थानीय लोग शामिल रहे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि शहर के कई वार्डों में लंबे समय से पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है। उन्होंने विभाग से तुरंत सप्लाई व्यवस्था सुधारने की मांग की।
रात को नहर में पानी पहुंचने के बाद राहत की उम्मीद
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार मूनक हेड से पानी छोड़ा जा चुका है और बुधवार रात तक जोगलान फीडर में पानी पहुंच सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे सप्लाई भी सामान्य की जाएगी। लोगों को उम्मीद है कि रात के बाद शहर और गांवों में पानी संकट से कुछ राहत मिल सकेगी।
खेतों की सिंचाई भी हुई प्रभावित
पेयजल संकट के साथ-साथ खेतों की सिंचाई पर भी असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने से फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। कई किसानों को ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खर्च भी बढ़ रहा है।

