Monday, September 21, 2026
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हरियाणा में 11 मई से प्रदेशव्यापी पशु टीकाकरण महाअभियान का होगा आगाज

चंडीगढ़ : हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य के पशुपालकों के हितों और प्रदेश के पशुधन की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा आगामी 11 मई 2026 से पूरे राज्य में मुंहखुर और गलघोंटू जैसी घातक बीमारियों के विरुद्ध एक विशेष प्रदेशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। एक महीने तक चलने वाले इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं को इन जानलेवा छूत की बीमारियों से बचाकर पशुपालकों को संभावित आर्थिक नुकसान से सुरक्षित करना है।

राणा ने बताया कि इस टीकाकारण अभियान में पशुपालकों की सुविधा के लिए विभाग की विशेष टीमें सीधे पशुपालकों के घर-द्वार पर पहुँचेंगी। पशुपालकों को अपने पशुओं को लेकर अस्पतालों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि विभाग के कुशल पशु चिकित्सक और सहायक घर-घर जाकर इस सेवा को सुनिश्चित करेंगे। सरकार के निर्देशानुसार, यह टीकाकरण-सेवा पूरी तरह से निःशुल्क प्रदान की जाएगी, ताकि प्रदेश के छोटे से छोटे पशुपालक पर भी कोई आर्थिक बोझ न पड़े।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने बताया कि टीकाकरण अभियान के तहत 4 महीने से अधिक आयु की सभी गायों और भैंसों का टीकाकरण किया जाएगा। पहले इन रोगों के लिए अलग-अलग टीके लगाए जाते थे, लेकिन अब हरियाणा देश का पहला और एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जहाँ इन दोनों बीमारियों से बचाव के लिए एक ही संयुक्त टीके का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पशुओं को बार-बार होने वाली पीड़ा से राहत मिली है और पशुधन का प्रबंधन भी सुगम हुआ है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के महानिदेशक डॉ० प्रेम सिंह ने बताया कि ने इस महा-अभियान की सफलता के लिए वैक्सीन के परिवहन और भंडारण हेतु पुख्ता इंतजाम किए हैं। टीकों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ‘आइस लाइन्ड रेफ्रिजरेटरों’ (ILRs) और कोल्ड चैन का विशेष प्रबंधन किया गया है। उन्होंने आह्वान किया कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें। जब भी विभाग की टीम उनके गांव या घर पर आए, तो अपने सभी पात्र पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं। पशुपालकों को समझना होगा कि समय पर किया गया यह टीकाकरण न केवल उनके पशुधन को सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, बल्कि प्रदेश की डेयरी अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।

उल्लेखनीय है कि मुंहखुर रोग एक खतरनाक वायरस के कारण होता है, जिससे पशुओं के मुंह और खुरों पर छाले पड़ जाते हैं, जिससे वे खाना-पीना छोड़ देते हैं और उनके दुग्ध उत्पादन व कार्य क्षमता पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं, गलघोंटू रोग एक गंभीर बैक्टीरिया जनित बीमारी है, जिसमें पशु के गले में सूजन आ जाती है और सांस लेने में भारी तकलीफ के कारण चंद घंटों में ही पशु की मृत्यु हो सकती है।

उन्होंने बताया कि अभियान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए पशुपालक अपने नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या औषधालय में संपर्क कर सकते हैं।

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