Thursday, October 15, 2026
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ऑफर की चमक, ठगी का जाल : त्योहारों पर साइबर ठगों के निशाने पर आपकी जेब

  • त्योहारों की खरीदारी में जरा सी चूक और खाता हो जाएगा खाली, ऑफर के जाल में फंसा रहे साइबर ठग

कविता.रोहतक : त्योहारों का सीजन है, बाजारों में रौनक है और ऑनलाइन शॉपिंग भी जोर पकड़ रही है। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गिफ्ट और घरेलू सामान खरीदने के लिए लोग अलग-अलग वेबसाइट और ऐप पर आकर्षक ऑफर तलाश रहे हैं। लेकिन खरीदारी के इस उत्साह के बीच साइबर ठग भी सक्रिय हैं।

कहीं सस्ते सामान का लालच दिया जा रहा है तो कहीं फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट और इनाम के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। जरा सी लापरवाही आपकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है। इसलिए त्योहारों की खरीदारी करते समय सावधान रहें और किसी भी अनजान लिंक या लुभावने ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें।

सस्ते सामान का ऑफर दिखाकर बिछाते हैं ठगी का जाल

त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप पर महंगे मोबाइल, लैपटॉप, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेहद कम कीमत पर बेचने के विज्ञापन दिखाई देते हैं। कई बार ठग नामी कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। ग्राहक कम कीमत देखकर ऑर्डर बुक कर देता है और ऑनलाइन भुगतान भी कर देता है, लेकिन सामान नहीं पहुंचता। कई मामलों में नकली या घटिया सामान भेज दिया जाता है। इसलिए किसी भी वेबसाइट से खरीदारी करने से पहले उसका पता, विक्रेता की जानकारी, रिटर्न पॉलिसी और ग्राहकों की विश्वसनीय समीक्षाएं जरूर जांचें। बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर मिलने वाला सामान संदेह पैदा करे तो खरीदारी से बचें।

फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही बैंक खाते पर खतरा

त्योहारों पर भारी छूट, कैशबैक, गिफ्ट वाउचर और विशेष ऑफर के नाम पर लोगों को एसएमएस, ईमेल और व्हाट्सऐप पर लिंक भेजे जा सकते हैं। इन पर क्लिक करने से ग्राहक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच सकता है, जहां उससे बैंक संबंधी जानकारी, कार्ड नंबर, सीवीवी या ओटीपी मांगा जाता है। कुछ लिंक मोबाइल में हानिकारक ऐप डाउनलोड करवाने की कोशिश भी कर सकते हैं। ऐसी जानकारी मिलते ही ठग खाते से रकम निकाल सकते हैं या भुगतान का दुरुपयोग कर सकते हैं। किसी भी अनजान लिंक से ऑफर का दावा जांचने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप खोलें। ओटीपी, यूपीआई पिन और कार्ड का गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें।

गिफ्ट और लकी ड्रॉ के नाम पर भी ठगी

त्योहारों के समय मुफ्त गिफ्ट, लकी ड्रॉ, इनाम और कैशबैक मिलने के संदेश भी लोगों को आकर्षित करते हैं। ठग फोन करके या मैसेज भेजकर बताते हैं कि आपका नाम किसी इनाम के लिए चुना गया है। इसके बाद इनाम की डिलीवरी, रजिस्ट्रेशन, टैक्स या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। कई बार इनाम पाने के लिए लिंक खोलने या बैंकिंग जानकारी देने को कहा जाता है। याद रखें, अनजान व्यक्ति के बताए इनाम के लालच में भुगतान करना भारी पड़ सकता है। किसी भी प्रतियोगिता या ऑफर की पुष्टि संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से करें और बिना जांचे किसी को पैसे न भेजें।

क्यूआर कोड स्कैन करने और पेमेंट रिक्वेस्ट स्वीकार करने में सावधानी

डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूपीआई से जुड़ी ठगी का खतरा भी बना रहता है। ठग पैसे भेजने के बजाय पैसे प्राप्त करने के नाम पर पीड़ित को यूपीआई पिन डालने या क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कह सकते हैं। कई बार फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदारों और ग्राहकों को भी धोखा दिया जाता है। ध्यान रखें कि सामान्य तौर पर यूपीआई से पैसे प्राप्त करने के लिए पिन डालने की जरूरत नहीं होती। भुगतान की पुष्टि हमेशा अपने बैंक खाते या यूपीआई ऐप में करें, केवल स्क्रीनशॉट देखकर भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति की पेमेंट रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसका टारगेट समझें।

ठगी हो जाए तो इंतजार नहीं, तुरंत करें शिकायत

ऑनलाइन ठगी का पता चलते ही जल्द से जल्द अपने बैंक या संबंधित भुगतान सेवा को सूचित करें, ताकि लेनदेन रोकने या रकम वापस पाने की संभावनाओं पर कार्रवाई हो सके। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक संदेश, ठग का मोबाइल नंबर, वेबसाइट का लिंक और उपलब्ध स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

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