रोहतक : प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से आए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों एवं जिला एफ.एल.एन. समन्वयकों ने राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय, सेक्टर-2, 3 व 4, रोहतक स्थित निपुण वाटिका का राज्य स्तरीय एक्सपोजर विजिट एवं ओरिएंटेशन के दौरान अध्ययन किया।
कार्यक्रम का नेतृत्व राज्य निपुण नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने किया। यह कार्यक्रम हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ;एचएसएसपीपी), पंचकूला के निर्देशानुसार आयोजित किया गया।

अधिकारियों ने निपुण वाटिका में गतिविधि-आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था का अवलोकन किया। कक्षा-कक्षों में बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप शिक्षण सामग्री, भाषा दीवार, अबेकस, गिनती सामग्री तथा डिजिटल बोर्ड जैसी सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को करके सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को छोटे समूहों में कार्य करते, एक-दूसरे को अपने उत्तर समझाते और स्वयं अपने कार्य की जांच करते हुए देखा गया।
दो वर्षों में नामांकन में लगभग 40 प्रतिशत वृद्धि
निपुण वाटिका की प्रभावशीलता का एक प्रमुख परिणाम विद्यालय के नामांकन में देखने को मिला है। अप्रैल 2024 में विद्यालय में 241 विद्यार्थी थे, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 337 हो गए। इस प्रकार दो वर्षों में 96 विद्यार्थियों की वृद्धि हुई, जो लगभग 40 प्रतिशत है। विद्यालय क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हुआ, बल्कि कक्षा-कक्षों में किए गए सुधारों ने शिक्षण वातावरण को अधिक आकर्षक बनाया। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक कक्षा को लगभग 1.80 लाख रुपये की लागत से तीन से चार दिनों में तैयार किया गया। इस पहल का नेतृत्व अतिरिक्त उपायुक्त, रोहतक एवं अध्यक्ष, निपुण रोहतक, श्री नरेंद्र कुमार, आईएएस ने किया। इसका उद्देश्य गतिविधि-आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देना तथा रोहतक को निपुण जिला बनाना है।

रोहतक में 50 और निपुण वाटिकाएं बनाने की तैयारी
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक अवसंरचना के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रोहतक जिले में 50 और निपुण वाटिकाएं बनाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि नामांकन, उपस्थिति और सबसे महत्वपूर्ण बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार इस पहल के प्रमुख मापदंड हैं।
सभी जिलों को उपलब्ध कराया गया है बजट
राज्य निपुण नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने निपुण 2.0 की राज्य प्राथमिकताओं की जानकारी देते हुए कहा कि निपुण वाटिका जैसे मॉडलों का तेजी से विस्तार किया जाना आवश्यक है। शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिलों को गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना तैयार करने के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है। अब जिलों को ऐसे मॉडलों को शीघ्र अपने विद्यालयों में धरातल पर उतारने की दिशा में कार्य करना है। अधिकारियों ने समीक्षा एवं चर्चा के दौरान यह भी जाना कि एक सुनियोजित कक्ष का उपयोग एक से अधिक कक्षाओं के लिए किया जा सकता है। शिक्षण-अधिगम सामग्री बच्चों के स्वयं उपयोग करने योग्य, संबंधित दक्षताओं एवं पाठ्यपुस्तक के क्रम से जुड़ी तथा शिक्षकों पर अतिरिक्त भार न डालने वाली होनी चाहिए। निपुण वाटिका को विद्यालय की साप्ताहिक समय-सारणी का नियमित हिस्सा बनाना भी आवश्यक है।
निपुण हरियाणा मिशन प्रदेश के 8,600 से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालयों तथा बाल वाटिका से कक्षा 3 तक के लगभग 4.6 लाख बच्चों तक पहुंच रहा है। रोहतक की निपुण वाटिका को उसके कार्य के लिए स्कॉच अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है।

