रोहतक शहर में बंदरों की समस्या के साथ अब आवारा और आक्रामक कुत्तों का आतंक भी बढ़ता जा रहा है। पुरानी हाउसिंग बोर्ड से सामने आए एक वीडियो में एक युवती पर कुत्ते के हमले की तस्वीरें लोगों को झकझोरने वाली हैं। कुत्ते ने युवती को कई जगह काटकर घायल कर दिया। यह स्थिति केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है। सेक्टर-1, सेक्टर-2, तिलक नगर समेत शहर की कई कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। पीजीआई और नागरिक अस्पताल में भी कुत्तों के काटने के मामले पहुंच रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब समस्या लगातार सामने आ रही है तो खतरनाक कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान कब चलेगा।
पुरानी हाउसिंग बोर्ड में युवती पर हमला, वीडियो से सामने आई दहशत
पुरानी हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र से सामने आए वीडियो में एक युवती पर कुत्ता हमला करता दिखाई दे रहा है। हमले के दौरान कुत्ते ने युवती को शरीर के कई हिस्सों पर काट लिया, जिससे वह लहूलुहान हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे कुत्ते से बचाया। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गलियों में घूमने वाले आवारा कुत्ते कब किस पर हमला कर दें, इसका कोई भरोसा नहीं है।
सेक्टर-1 में दिनदहाड़े झुंड का आतंक, बाइक सवारों के लिए खतरा
सेक्टर-1 में भी आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार कुत्तों का झुंड मुख्य रास्ते पर ही जमा रहता है। बाइक या स्कूटी से निकलने वाले लोगों को देखकर कुत्ते पीछे दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में वाहन चालक संतुलन खोने से भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि रात के समय तो समस्या और गंभीर हो जाती है, लेकिन अब दिन में भी इन कुत्तों के झुंड से बचकर निकलना पड़ता है।
सेक्टर-2, तिलक नगर समेत कई कॉलोनियों में यही हाल
आवारा कुत्तों की समस्या पुरानी हाउसिंग बोर्ड और सेक्टर-1 तक सीमित नहीं है। सेक्टर-2, तिलक नगर और शहर की अन्य रिहायशी कॉलोनियों में भी लोगों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं और राहगीरों तथा वाहन चालकों के पीछे दौड़ते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवारों की चिंता ज्यादा है। लोगों का कहना है कि गली-मोहल्लों में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
पीजीआई और नागरिक अस्पताल में पहुंच रहे डॉग बाइट के मामले
कुत्तों के हमले की घटनाओं का असर अस्पतालों में भी दिखाई दे रहा है। शहर में कुत्ते के काटने के बाद लोग इलाज और एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए पीजीआई और नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर रोज ऐसे मरीजों का पहुंचना इस समस्या की गंभीरता की ओर इशारा करता है। लोगों का कहना है कि केवल काटने के बाद इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमले की घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
खतरनाक कुत्तों को पकड़ने का अभियान कब चलेगा
शहरवासियों का सवाल है कि जब अलग-अलग इलाकों से कुत्तों के हमले की शिकायतें सामने आ रही हैं तो नगर निगम की ओर से खतरनाक और आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा। लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल किसी बड़ी घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए। जिस तरह बंदरों की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, उसी तरह अब आवारा कुत्तों की समस्या भी शहर के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।


