Saturday, November 7, 2026
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रोहतक में प्रदूषण से आंखें लाल, एलर्जी के मरीज बढ़े; दिवाली की आतिशबाजी बढ़ाएगी सांसों का संकट

  • एक्यूआई 306 पर पहुंचा, पीजीआई और नागरिक अस्पताल में आंखों में जलन, खुजली और एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंच रहे मरीज
  • ग्रैप-3 लागू होने के बाद भी हवा की सेहत बिगड़ी

कविता.रोहतक: शहर की हवा अब लोगों की सेहत पर सीधा असर डालने लगी है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही आंखों में जलन, लालिमा और खुजली के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पीजीआई और नागरिक अस्पताल में आंखों से संबंधित समस्याओं और एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रदूषित हवा के कारण दमा और सांस के रोगियों की परेशानी भी बढ़ रही है।

रोहतक का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 306 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। हालात को देखते हुए ग्रैप-3 की पाबंदियां भी लागू हो चुकी हैं।

चिंता की बात यह है कि दिवाली की आतिशबाजी अभी बाकी है। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला धुआं और जहरीले कण हवा को और जहरीला बना सकते हैं। त्योहार की खुशियों के बीच लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

आंखों में जलन, लालिमा और खुजली से बढ़ी परेशानी

हवा में मौजूद धूल, धुआं और सूक्ष्म प्रदूषक कण आंखों की सतह को प्रभावित कर रहे हैं। इसके चलते आंखों में लालिमा, जलन, खुजली और पानी आने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। पीजीआई और नागरिक अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। खासकर खुले वातावरण में अधिक समय बिताने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। आंखों को बार-बार रगड़ने से समस्या बढ़ सकती है। चिकित्सकों की सलाह है कि परेशानी होने पर खुद से आई ड्रॉप डालने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें।

दमा और सांस के मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दमा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ता है। हवा में मौजूद पीएम-2.5 और पीएम-10 जैसे सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इससे खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीज सुबह और देर शाम प्रदूषण के स्तर को देखते हुए बाहर निकलने से बचें।

ग्रैप-3 लागू, फिर भी हवा की सेहत खराब

रोहतक में एक्यूआई 306 तक पहुंचना हवा की बिगड़ती स्थिति को दर्शाता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू की गई हैं। इस स्तर पर निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर सख्ती, धूल नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर कार्रवाई जैसे कदम महत्वपूर्ण होते हैं। सड़क की धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली मिट्टी और औद्योगिक उत्सर्जन प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केवल सरकारी पाबंदियां काफी नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

दिवाली की आतिशबाजी बढ़ा सकती है प्रदूषण का खतरा

प्रदूषण के मौजूदा हालात के बीच दिवाली की आतिशबाजी चिंता बढ़ा रही है। पटाखों से निकलने वाला धुआं, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बारीक कण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा सकते हैं। रात के समय हवा की गति कम होने पर ये प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इससे अगले दिन भी लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने की मजबूरी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस के मरीजों के लिए जोखिम ज्यादा है। लोगों को पटाखों से दूरी बनाने, धूल वाले इलाकों में जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। आंखों में परेशानी होने पर साफ पानी से धोएं और लक्षण बने रहने पर डॉक्टर को दिखाएं।

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