कविता.रोहतक : शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गलियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में झुंड के रूप में घूमते कुत्ते राहगीरों और बच्चों के लिए खतरा बन रहे हैं।
दूसरी तरफ नगर निगम की ओर से कुत्तों की धरपकड़, नसबंदी और एंटी रेबीज वैक्सीनेशन को लेकर व्यवस्था सवालों के घेरे में है। निगम का पिछला एबीसी कार्यक्रम जनवरी में रोका गया था और मार्च में नए अनुबंध की प्रक्रिया चल रही थी। फरवरी में निगम ने कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी और वैक्सीनेशन के लिए नया टेंडर भी जारी किया था।
कुत्तों का आतंक बढ़ा, इंतजाम कहां हैं
शहर के अलग-अलग हिस्सों से लगातार कुत्तों के काटने और पीछा करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई जगह आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं और राहगीरों, बच्चों तथा दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ते हैं। ऐसे में लोगों के बीच डर का माहौल है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं तो नगर निगम की ओर से कुत्तों की धरपकड़ और वैक्सीनेशन अभियान कितनी तेजी से चल रहा है। लोगों को यह जानना जरूरी है कि शिकायत के बाद कार्रवाई के लिए निगम के पास फिलहाल क्या व्यवस्था है।
नसबंदी-वैक्सीनेशन पर ब्रेक का असर
मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों की संख्या हजारों है। उस समय करीब 64 लाख रुपये के सालाना एबीसी कार्यक्रम के लिए नए ठेके की प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें कुत्तों की नसबंदी के साथ एंटी रेबीज वैक्सीनेशन भी शामिल था। इससे पहले जनवरी में 32 आवारा कुत्तों की मौत के मामले के बाद पुराना काम रुक गया था। ऐसे में अब सवाल यह है कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है और कितने कुत्तों को वास्तव में पकड़कर वैक्सीनेट और स्टरलाइज किया जा रहा है।
पालतू खतरनाक नस्लों पर भी निगम की नजर जरूरी
सिर्फ आवारा कुत्ते ही नहीं, बल्कि घरों में पाले जा रहे बड़े और खतरनाक नस्ल के कुत्तों को लेकर भी निगरानी जरूरी है। हरियाणा में नगर निकायों के स्तर पर डॉग रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है और नगर निगम क्षेत्र में डॉग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने की सेवा भी उपलब्ध है। कानून में यह प्रावधान है कि जिन कुत्तों से लोगों को डराने या नुकसान पहुंचाने की आशंका हो, उन्हें सार्वजनिक स्थान पर बिना मुझल और चेन-लीड के नहीं छोड़ा जा सकता।
कितने पालतू कुत्ते रजिस्टर्ड, निगम को देना चाहिए जवाब
अब निगम को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि रोहतक शहर में कितने पालतू कुत्ते रजिस्टर्ड हैं और इनमें खतरनाक मानी जाने वाली नस्लों के कितने कुत्ते शामिल हैं। क्या इन कुत्तों का रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन और पहचान संबंधी रिकॉर्ड निगम के पास है। क्या ऐसे कुत्तों के मालिकों को सार्वजनिक स्थान पर मुझल और चेन-लीड के नियम की जानकारी दी गई है। हाल ही में सोनीपत में भी पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल उठे थे और निगम के रिकॉर्ड में महज तीन पालतू कुत्ते पंजीकृत बताए गए थे। ऐसे में रोहतक में भी निगम के रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी
शहर के लोगों का सवाल सीधा है कि अगर सड़कों पर घूमते कुत्तों से खतरा बढ़ रहा है तो उनकी धरपकड़, नसबंदी और वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। लोगों को हर समय कुत्तों से बचकर निकलने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। निगम को वार्डवार अभियान चलाकर संवेदनशील इलाकों की पहचान, डॉग बाइट की शिकायतों का रिकॉर्ड, आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन और नसबंदी की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को यह भरोसा हो कि शहर में डॉग कंट्रोल के लिए सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी व्यवस्था मौजूद है।


