- गड्ढों और जलभराव से बढ़ी परेशानी, मरम्मत का इंतजार कर रहे लोग
कविता. रोहतक : मानसून आने से पहले ही शहर की सड़कों की हालत लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों की संपर्क सड़कें तक जगह-जगह टूट चुकी हैं। कई इलाकों में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर बिना बारिश के ही पानी जमा रहने से सड़कें और खराब हो रही हैं।
ऐसे में बारिश शुरू होने के बाद हालात और बिगड़ने की आशंका है। रोजाना हजारों लोग इन रास्तों से गुजरते हैं, लेकिन सड़कें अब सफर को आसान बनाने के बजाय खतरे का कारण बनती जा रही हैं। वाहन चालकों को गड्ढों से बचते हुए चलना पड़ रहा है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए जोखिम और अधिक बढ़ गया है।
नगर निगम की ओर से हर साल मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस बार भी कई प्रमुख मार्गों पर हालात जस के तस दिखाई दे रहे हैं। कई जगहों पर मरम्मत कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है, जबकि कुछ कार्य प्रक्रियाओं और टेंडर संबंधी औपचारिकताओं में अटके बताए जा रहे हैं।
इन इलाकों की सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित
पुराने शहर की हालत खराब है। सेक्टर-1 की सड़कें, सेक्टर-3 की भी हालत खराब, नया बस अड्डा के समाने और आसपास, पुलिस लाइन रोड के पास, सुभाष चौक के आसपास का इलाका, गोहाना अड्डा मार्ग, विकास नगर, आजादगढ़, हुडा सिटी पार्क के आसपास, सोनीपत स्टैंड और सोनीपत रोड।
जलभराव बना सड़कों का सबसे बड़ा दुश्मन
विशेषज्ञों के अनुसार सड़कों के जल्दी टूटने की सबसे बड़ी वजह जल निकासी व्यवस्था की कमजोरी है। नालों और सीवर का पानी सड़कों पर आने से सड़क की परत कमजोर हो जाती है। इसके बाद वाहनों के दबाव से सड़क टूटने लगती है और गड्ढे बन जाते हैं।
बारिश में बढ़ सकता है हादसों का खतरा
बरसात के दौरान गड्ढे पानी में छिप जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। खासकर रात के समय और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक हो जाती है। पिछले वर्षों में भी जलभराव वाले गड्ढों के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
शिकायत व्यवस्था की जानकारी नहीं
सरकार ने सड़क संबंधी शिकायतों के लिए डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध कराई है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। स्थानीय स्तर पर जागरूकता की कमी के कारण नागरिक शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। इसका असर यह है कि कई समस्याएं अधिकारियों तक समय पर पहुंच ही नहीं पातीं।
लोगों की मांग: पहले सड़कें, फिर दावे
सेक्टर- 3 के जगमाल, आशुतोष, हरज्ञान आदि का कहना है कि हर वर्ष मानसून से पहले सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं देता। लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले प्रमुख मार्गों के गड्ढे भरने, टूटी सड़कों की मरम्मत करने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए।
स्थिति गंभीर क्यों
- कई सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं।
- जलभराव से सड़कें लगातार कमजोर हो रही हैं।
- दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा खतरा है।
- मानसून शुरू होने पर समस्या और बढ़ सकती है।
- मरम्मत कार्य अभी भी पूरी गति नहीं पकड़ पाया है।

