कविता. रोहतक : पीजीआई में सीटी स्कैन और एमआरआई करवाने में ऐसा खेल चल रहा है, जिसे पकड़ना लगभग मुश्किल है, लेकिन एक आरटीआई ने सब कुछ सामने लाकर रख दिया है।
आरटीआई में जो जानकारी दी गई है, उससे साफ हो रहा है कि गड़बड़ तो है। यह गड़बड़ पीजीआई में पीपीपी मोड़ पर सीटी स्कैन और एमआरआई करवाने के लिए आ रहे गरीब मरीजों को लेकर सामने आई है। पीपीपी मोड़ पर जो मशीनें लगाई गई हैं, उन मशीनों पर अब से केवल 9 महीने पहले तक हर महीने करीब 270 से 280 बीपीएल कार्ड धारकों, एससी, आयुष्मान कार्ड धारकों और सरकारी कर्मचारियों के सीटी स्कैन और एमआरआई निशुल्क होते थे, लेकिन अब हर महीने केवल 35 से 40 बीपीएल कार्ड धारकों के ही निशुल्क टेस्ट हो रहे हैं। पूरा गोलमाल इसी संख्या में छिपा है।
आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि 9 महीने के अंदर ही बीपीएल कार्ड धारक पीपीपी मोड़ पर लगी मशीनों पर सीटी स्कैन और एमआरआई करवाने से कतराने लगे या यहां तक उनके पहुंचने का रास्ता ही बंद कर दिया गया। इसका बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि गरीब और पात्र मरीजों को फ्री सीटी और एमआरआई का लाभ मिलना बहुत कम हो गया है। पूरा मामला समझाते हैं हो क्या रहा है।
दरअसल पीजीआई की नई ओपीडी में पीपीपी मोड़ पर लैब स्थापित की गई है। जब इस लैब का एमओयू हुआ तो करार हुआ था कि बीपीएल कार्ड धारकों, एससी, आयुष्मान कार्ड धारकों और सरकारी कर्मचारियों के सीटी स्कैन और एमआरआई निशुल्क करने होंगे। सब कुछ ठीक चल रहा था। हर महीने मरीजों के 10 प्रतिशत के हिसाब से करीब 270 से 280 पात्र मरीजों के सीटी स्कैन और एमआरआई निशुल्क किए जाते थे। लेकिन अब संख्या 35 से 40 रह गई है।
इसका कारण ये है कि कुछ महीने पहले पात्र लोगों को पीपीपी मोड तक भेजने की प्रक्रिया की पॉवर एमएस डॉ. कुंदन मित्तल के हाथों में आने के बाद इतनी जटिल कर दी गई कि, यहां तक वो पहुंच ही नहीं पाते। जो पात्र होते हैं, उन्हें पीजीआई की मशीनों पर ही टेस्ट करवाने के लिए लिख दिया जाता है।
यह पूरा खेल है, पीपीपी मोड पर लगाई गई लैब के संचालकों को फायदा पहुंचाने का। अब इस पूरे मामले में गड़बड़झाले की बू आने लगी है।
पहले यह प्रक्रिया थी
करीब 9 महीने पहले अगर किसी एससी कैटेगरी, बीपीएल और आयुष्मान कार्ड धारक और किसी सरकारी कर्मचारी को सीटी स्कैन या एमआरआई करवानी होती थी तो, पहले अपने कार्ड पर जो फार्म भरा जाता है, उस पर संबंधित विभाग के अध्यक्ष, इमरजेंसी में बैठे सीएमओ और उसके बाद क्लर्क से साइन करवाने होते थे। इसके बाद आसानी से पीपीपी मोड पर निशुल्क उनका सीटी स्कैन या एमआरआई हो जाता था।
ऐसे जटिल बनाई प्रक्रिया
करीब 9 महीने पहले पीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. कुंदन मित्तल ने इस पॉवर को अपने हाथ में ले लिया। क्लर्क के बाद एमएस के साइन होंगे और एमएस चाहेंगे तो ही पीपीपी मोड़ पर निशुल्क सीटी स्कैन या एमआरआई हो पाएगा। इसके बाद तेज गति से पीपीपी मोड़ पर निशुल्क टेस्ट करवाने वालों की संख्या घटी, क्योंकि अधिकतर को पीजीआई की मशीनों पर ही टेस्ट करवाने के अनुमति दी गई, पीपीपी मोड़ पर लगी मशीनों तक पात्र लोगों का पहुंचना ही बंद हो गया।
एक साल में करीब 325 से 350 लोगों के ही फ्री टेस्ट किए गए
इस मामले की भनक लगने पर एक व्यक्ति से आरटीआई लगाई और पीपीपी मोड़ वालों से जवाब मांगा कि कितने लोगों के फ्री सीटी स्कैन और एमआरआई किए। जवाब मिला कि एक साल में करीब 325 से 350 लोगों के ही फ्री टेस्ट किए गए हैं। जबकि पहले यह संख्या करीब 3 हजार से ज्यादा होती थी।
पहले वाला सिस्टम लागू कर दिया
आरटीआई लगने के बाद (एमएस) डॉ. कुंदन मित्तल ने करीब तीन पहले ही तुरंत अपनी पॉवर छोड़ दी और पहले वाला सिस्टम लागू कर दिया। लेकिन अब भी पीपीपी मोड़ पर लैब संचालकों को ज्यों का त्यों लाभ पहुंचाया जा रहा है और मरीजों को पीजीआई में ही टेस्ट करवाने के लिए लिखा जा रहा है।
परेशानी यह है, 2-3 महीने की वेटिंग
पीजीआई की पुरानी बिल्डिंग में सीटी स्कैन या एमआरआई करवाने के लिए 2 से 3 महीने की वेटिंग मिलती है। इसके बाद ही मरीज का टेस्ट हो पाता है। ऊपर से पीजीआई में कंट्रास्ट नहीं है, कंट्रास्ट एक तरह का केमिकल इंजेक्शन होता है, जिससे बीमारी और साफ दिखती है। मरीज को एक हजार रुपये का कंट्रास्ट भी खरीदना है और 2 से 3 महीने की वेटिंग भी करनी है। एक बात यह भी है कि यहां टेस्ट की फिल्म नहीं मिलती। मरीज परेशान होकर या तो पीपीपी मोड़ पर रुपए देकर टेस्ट करवाता है या कहीं प्राइवेट में अपना टेस्ट करवाने के लिए मजबूर है।
यह भी सोचने वाली बात है
- पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर और डिपार्टमेंट में सीटी और एमआरआई की चार मशीनें हैं। 3 कंसल्टेंट हैं, 6 एसआर हैं, 18 पीजी स्टूडेंटस हैं, फर भी दो महीने की वेटिंग मिल रही है। दूसरी ओर पीपीपी मोड़ पर जो लैब लगाई गई है, उनके पास कुल 2 मशीनें हैं और सिर्फ 2 डॉक्टर हैं।
- सीधा सा मतलब है, पीजीआई में कम टेस्ट और वेटिंग लंबी होगी तो मरीज पीपीपी मोड़ पर ही आएंगे। पूरा का पूरा खेल पीपीपी मोड़ पर लैब चलाने वालों को हर महीने लाखों रुपये का फायदा पहुंचाने का है। क्योंकि जो टेस्ट पहले फ्री होते थे, अब पीपीपी मोड़ वालों को करने नहीं पड़ रहे।

