Sunday, June 21, 2026
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बलियाणा की बची जमीन पर नया संकट, हाइटेंशन लाइन से बढ़ी किसानों की चिंता

  • 70 फीसदी जमीन पहले ही आईएमटी में गई, अब बची कृषि भूमि के ऊपर बिजली लाइन डालने से होगी दिक्कत

कविता.रोहतक : गांव बलियाणा में प्रस्तावित हाइटेंशन बिजली लाइन अब केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए अस्तित्व का सवाल बनती जा रही है। गांव की बड़ी आबादी का कहना है कि वर्षों से विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीन कम होती गई और अब जो कृषि भूमि बची है, उस पर भी खतरा मंडरा रहा है।

इसी चिंता को लेकर ग्रामीण पिछले दिनों जिला पार्षद परीक्षित देशवाल के नेतृत्व में लघु सचिवालय भी पहुंचे थे और बिजली लाइन का रूट बदलने की मांग की।

विकास की कीमत चुकाता रहा बलियाणा

ग्रामीणों का कहना है कि बलियाणा ने हमेशा विकास परियोजनाओं में सहयोग दिया है। आईएमटी के विस्तार के लिए गांव की हजारों एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। कभी चारों ओर खेतों से घिरा रहने वाला गांव अब तीन दिशाओं से औद्योगिक क्षेत्र से घिर गया है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि विकास का बोझ आखिर कब तक केवल बलियाणा ही उठाएगा।

बची जमीन पर भी मंडराने लगा खतरा

गांव के लोगों के अनुसार करीब 70 प्रतिशत भूमि पहले ही अधिग्रहण की भेंट चढ़ चुकी है। अब केवल लगभग 30 प्रतिशत जमीन बची है, जिस पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका निर्भर है। प्रस्तावित हाइटेंशन लाइन इसी क्षेत्र से गुजरने की योजना है। किसानों का कहना है कि यदि लाइन खेतों के ऊपर से निकाली गई तो जमीन का उपयोग सीमित हो जाएगा और भविष्य में निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ेगा।

खेती से लेकर भविष्य की योजनाओं तक चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि हाइटेंशन लाइन केवल बिजली के तार नहीं होती, बल्कि उसके साथ कई तरह की पाबंदियां भी जुड़ जाती हैं। खेतों में बड़े पेड़ नहीं लगाए जा सकते, निर्माण कार्य प्रभावित होते हैं और जमीन का बाजार मूल्य भी प्रभावित होता है। यही कारण है कि लोग इसे अपनी कृषि और भविष्य दोनों के लिए खतरा मान रहे हैं।

पंचायती जमीन भी हो चुकी है प्रभावित

ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि गांव की 70 से 80 एकड़ पंचायती भूमि भी पहले ही अधिग्रहण की जद में आ चुकी है। उस भूमि के बदले मिले धन को गांव के विकास कार्यों पर खर्च कर दिया गया, लेकिन जमीन एक बार चली गई तो वापस नहीं आई। अब ग्रामीणों को डर है कि लगातार भूमि कम होने से आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन और अवसर दोनों सिमटते जाएंगे।

कोई दूसरा रास्ता अपनाए प्रशासन

जिला पार्षद परीक्षित देशवाल ने कहा कि गांव ने हर विकास परियोजना में सहयोग दिया है, लेकिन लोगों की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाइटेंशन लाइन के लिए कोई दूसरा मार्ग तलाशा जाए, ताकि गांव की बची हुई कृषि भूमि और लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। उनका कहना है कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

गांव में बढ़ रहा असंतोष

हाइटेंशन लाइन के मुद्दे ने अब गांव में जनआंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। अलग-अलग समाजों और संगठनों के लोग एक मंच पर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो विरोध और तेज किया जाएगा। फिलहाल पूरे गांव की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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