रोहतक : जब किसी मरीज की सांस अचानक रुकने लगे, हृदय की धड़कन बिगड़ जाए या किसी दुर्घटना के बाद शरीर भीतर से जवाब देने लगे तो डॉक्टर के पास सोचने के लिए कुछ सेकंड ही होते हैं। ऐसे में एक-एक मिनट कीमती हो जाता है। इसी सच्चाई को समझते हुए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने पीजीआईएमएस की क्रिटिकल केयर सेवाओं में ऐसा बदलाव किया है जो गंभीर मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि अब पीजीआईएमएस में ट्रॉमा आईसीयू, सीटीवीएस, नवजात शिशु विभाग और मॉड्यूलर आईसीयू में चार नई अत्याधुनिक ब्लड गैस एनालाइज़र मशीनें स्थापित कर दी गई हैं। सभी चारों मशीनें पूरी तरह शुरू हो चुकी हैं और मरीजों के लिए काम कर रही हैं।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि ब्लड गैस एनालाइज़र एक ऐसी मशीन है जो मरीज की धमनी से लिए गए खून की कुछ बूंदों से यह बता देती है कि उसके शरीर में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर क्या है, खून का एसिड-बेस संतुलन ठीक है या बिगड़ गया है, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम जैसे जरूरी लवण कितने हैं। आसान भाषा में कहें तो यह मशीन डॉक्टर को यह बताती है कि मरीज के शरीर के अंदर क्या चल रहा है। श्वसन फेल हो रहा है या किडनी, हृदय रोगी को ऑपरेशन के बाद वेंटिलेटर कितना देना है, नवजात शिशु को ऑक्सीजन की कितनी मात्रा चाहिए, शॉक में गए मरीज को कौन सी दवा तुरंत देनी है, इन सभी सवालों का जवाब बीजीए रिपोर्ट से आसानी से मिलता है। पहले ऐसी जांच के लिए खून आपातकाल के पास स्थित लैब में भेजा जाता था और वहां तक जाने ओर रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता था।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि पीजीआईएमएस का उद्देश्य सिर्फ इलाज करना नहीं बल्कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी वही सुविधा देना है जो देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल में मिलती है। उन्होंने कहा कि हम हरियाणा सरकार के सहयोग से पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को उच्च गुणवत्ता की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। जब एक मां अपने नवजात को लेकर आती है या एक बेटा अपने पिता को ट्रॉमा में लेकर आता है तो उसे खर्चे की चिंता नहीं होनी चाहिए, उसे सिर्फ अपने मरीज की जल्दी ठीक होने की चिंता होनी चाहिए। इसी सोच के साथ हमने यह कदम उठाया है। डॉ. अग्रवाल ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पीजीआईएमएस को उत्तर भारत का सबसे बड़ा क्रिटिकल केयर सेंटर बनाया जाएगा।
कुलसचिव डॉ रूप सिंह ने बताया कि निजी अस्पतालों में एक बीजीए टेस्ट की कीमत 800 रुपये से 1500 रुपये तक होती है। आईसीयू में भर्ती मरीज का दिन में कई बारी तीन से चार बार यह टेस्ट होता है। यानी एक मरीज पर सिर्फ इस जांच का खर्च ही करीब 5 हजार रुपये रोजाना पहुंच सकता है। गरीब और मध्यम वर्ग का मरीज यह खर्च उठा ही नहीं पाता था। इसी पीड़ा को देखते हुए कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने फैसला लिया कि पीजीआईएमएस में आने वाले हर इमरजेंसी और आईसीयू मरीज को यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त में उनके आईसीयू के पास प्रदान की जाए।
कुलपति डॉ एच के अग्रवाल के इस फैसले के फायदे सीधे आम जनता को मिलेंगे। सबसे पहला और सबसे बड़ा फायदा समय का है। अब ट्रॉमा आईसीयू में सड़क दुर्घटना का घायल आएगा तो कुछ मिनटों में पता चल जाएगा कि उसके फेफड़े कितना काम कर रहे हैं। सीटीवीएस में बाईपास के बाद मरीज की हालत पर हर घंटे नजर रखी जा सकेगी। नियोनेटोलॉजी में समय से पहले जन्मे बच्चे की सांस की गति को तुरंत ठीक किया जा सकेगा और मॉड्यूलर आईसीयू में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर वाले मरीज को तुरंत सही वेंटिलेटर सपोर्ट मिलेगा। रिपोर्ट जल्दी मिलने से डॉक्टर जल्दी ईलाज दे सकेगा, वेंटिलेटर की सेटिंग सही होगी और मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। दूसरा फायदा पैसे का है। एक गंभीर मरीज का प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू का बिल लाखों में जाता है जिसमें जांच का खर्च सबसे बड़ा हिस्सा होता है। यह जांच पीजीआई मुफ्त में कर रहा है जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी। तीसरा फायदा एक खिड़की पर भीड़ कम होने का है। पहले इमरजेंसी की एक दो मशीनों पर पूरे अस्पताल का बोझ था।
जनसम्पर्क विभाग के सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. मंजुनाथ बी.सी. ने कहा कि बीजीए मशीन सिर्फ एक उपकरण नहीं है, यह जीवन रक्षक है। आईसीयू में भर्ती मरीज की स्थिति हर 10 मिनट में बदलती है, इससे इलाज में गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कई बार परिवार वाले मरीज को बाहर इसलिए ले जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था सरकारी अस्पताल में जांच लेट होती है। अब पीजीआईएमएस में निजी से भी तेज सेवा मिलेगी और वह भी मुफ्त। डॉ मंजूनाथ ने बताया कि पीजीआईएमएस ने आज यह दिखा दिया है कि आपातकालीन मरीजों के लिए समय ही जीवन है और उस समय को बचाने के लिए पीजीआईएमएस ने एक नया आयाम स्थापित कर दिया है।
कुलपति डॉ अग्रवाल का यह कदम पीजीआईएमएस को देश के टॉप अस्पतालों की श्रेणी में ले जाएगा। अब हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश का कोई भी गंभीर मरीज यह सोचकर रोहतक आएगा कि यहां उसे न सिर्फ सबसे अच्छा डॉक्टर मिलेगा बल्कि सबसे तेज और सबसे सस्ती जांच भी मिलेगी।


