रोहतक। रोहतक में एक बार फिर खाकी बदनाम हो गई। दिल्ली बाइपास स्थित एक होटल में तेज कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर दिया। वहीं सुसाइड करने से पहले उसने 2 पेज का सुसाइड नोट लिखा है। जिसमें पुलिसकर्मी सहित 5 लोगों पर तंग करने व रुपए ऐंठने के आरोप लगाए हैं। जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। वहीं यह सुसाइड नोट उसने अपने परिवार वालों के पास भी भेज दिया। इसी वजह से कल शाम को मृतक के परिजनों ने आईजी ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन किया। अभी भी कार्रवाई नहीं हुई इसलिए गुरुवार को एसपी ऑफिस पर धरना देने के लिए पहुंचे हुए हैं।

विजय सुसाइड मामले में कल शाम को दिल्ली बाईपास स्थित आईजी ऑफिस के सामने शव रख कर न्याय की गुहार लगाई थी। आश्वासन के बावजूद अभी तक आरोपी गिरफ्तार नहीं किये गए। इसी वजह से गुरुवार सुबह परिजन और तेज कलोनी के लोग एसपी रोहतक ऑफिस पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया। अभी तक एसपी हिमांशु गर्ग पीड़ितों से नहीं मिले। डीएसपी रवि खुंडिया ने परिजनों को समझाने का प्रयत्न किया लेकिन परिजन नहीं माने और अभी भी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।

दिहाड़ी-मजदूरी करता था मृतक
मामले के अनुसार रोहतक की तेज कॉलोनी निवासी जय प्रकाश ने पुरानी सब्जी मंडी थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई करीब 44 वर्षीय विजय उर्फ काला 26 मार्च को सुबह करीब 11 बजे घर से गया था। जो दिहाड़ी-मजदूरी का काम करता था। उस समय वह काम पर जाने की बात कहकर घर से निकला था। लेकिन वापस नहीं लौटा। रात को करीब 3 बजे उसके भाई ने फोन पर 2 पेज का सुसाइड नोट लिखा कर भेजा था।

2 पेज का लिखा सुसाइड नोट
जयप्रकाश ने बताया कि सुसाइड नोट में विजय ने 5 लोगों को नाम लिखा है। जिनमें एक रिटायर्ड पुलिस वाला भी है। आरोपी उसके भाई को एनडीपीएस एक्ट में फंसाने के नाम पर रुपए एंठते रहते थे। वहीं अन्य आरोपी नशे के सौदागर है। जब उन्हें सुसाइड नोट मिला तो वे पुलिस के पास पहुंचे, लेकिन पुलिस ने भी उनकी ठीक से सुनवाई नहीं की। हालांकि गुमशुदा होने की एफआईआर जरूर दर्ज कर ली।
आईजी ऑफिस के बाहर शव रखकर किया प्रदर्शन
उन्होंने बताया कि लापता होने के बाद लगातार वह अपने भाई के पास फोन कर रहा था। बुधवार को उनके भाई के फोन पर फोन किया तो किसी पुलिस वाले ने उठाया। तब पता चला कि दिल्ली बाइपास स्थित एक होटल में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। इसका पता लगने के बाद वे मौके पर पहुंचे। वहीं पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उन्होंने आईजी ऑफिस के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। काफी समय विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस वालों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया तो परिजन शव आईजी ऑफिस के बाहर से उठाने को माने।
सुसाइड नोट में लिखी आपबीती
जानकारी के मुताबिक सुसाइड नोट में विजय ने लिखा है कि मैं विजय कुमार ब्यान करता हूं कि पुलिस कर्मी जिसका नाम रामधारी है और वह डेयरी मोहल्ला का निवासी है। एक दिन जब मैं अपने दैनिक कार्य से घर लौट रहा था तो उसने मुझे गोहाना अड्डे पर रोक लिया और मुझसे बोला तू सट्टा खाईवाली का काम करता है। तू मेरे साथ बाइक पर बैठ, मैंने इनकार किया तो वो बोला तुझ पर पिस्टल व चरस का केस लगाकर 10 साल तक अंदर करवा दूंगा। जैसे तेरा भाई सुरेंद्र जेल में अंदर करवाया था।
मैं डर के मारे उसकी बाइक पर बैठ गया। वह मुझे गौकर्ण पार्क पर ले गया और बोला हर तीन महीने में मुझे 30 हजार रुपए चाहिए। अगर इस बारे में किसी को बोला तो पिस्टल व चरस का केस लगवाकर अंदर डाल दूंगा। मुझसे कई किश्तों में लगभग 4 लाख रुपए वसूल किए। वो इतना शातिर था कि उसने कभी फोन का इस्तेमाल नहीं किया। वो एक लोकेशन पर पैसे लेता व तीन महीने बाद दूसरी लोकेशन बताता। इस कार्य में सोनू, सुरेश, जग्गे व सरदार उर्फ जुड़ी का हाथ बताया गया था। कुछ साल पहले सोनू, जग्गे, सुरेश ने सरदार उर्फ जुड़ी के हाथों मेरे भाई सुरेंद्र की दुकान में 180 ग्राम चरस रखवाई थी। इन्होंने रामधारी, बलराज, सीलकराम व अन्य एक पुलिस कर्मचारी से मिलीभगत करके मेरे भाई को जेल भिजवाया था।
जग्गे व रामधारी ने केस खत्म करने की एवज में हमसे 20 हजार रुपए वसूले थे। फिर भी उन्होंने चालान काट दिया था। इस पुलिसकर्मी की वजह से सोनू कोरेक्स और चरस का सरेआम काम करता है। जग्गे अवैध शराब का कार्य करता है। सुरेश औप जुड़ी सट्टा खाईवाली का कार्य करते हैं। इन्होंने अपने फायदे के लिए छोटे-छोटे बच्चों को कोरेक्स व चरस की लत लगा दी। इन्होंने सारे समाज का माहौल खराब करके रख दिया। मोहल्ले वाले झगडे़ के डर से इनकी शिकायत नहीं करते। मैं प्रार्थना करता हूं कि मेरे भाई सुरेंद्र वाले केस को भी ओपन किया जाए व आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। ताकि वे भविष्य में किसी निर्दोष व्यक्ति को जेल ना भेज सके। रामचारी, सोनू, जग्गा, सुरेश, सरदार उर्फ जुड़ी ने मुझे आत्महत्या के लिए मजबूर किया है।
अदालत इन्हें कड़ी से कड़ी सजा दे। हमें तो पता भी नहीं था कि मेरे भाई की दुकान पर चरस किसने रखी है। एक झगड़े के दौरान सोनू ने कहा कि चरस हमने रखी थी और तेरा भाई हमने उठवाया था। तुम हमारा क्या कर लोगे। सोनू, जग्गा, सुरेश इनको शक था कि में सट्टा खाईवाली का काम करता हूं। इन्होंने ही रामधारी को बोलेकर मुझसे लगभग 4 लाख रुपए वसूल करवाए हैं। जिससे मेरी पारिवारिक हालत भी खराब हो गई और मुझे आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ा। मेरा समाज मुझे नशा मुक्त चाहिए, मैं मर गया तो क्या हुआ मेरे समाज को तो भला होगा। धानक समाज जिंदाबाद।
5 पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस
पुरानी सब्जी मंडी थाना के SHO सुनील कुमार ने बताया कि विजय के लापता होने का पहले ही मामला दर्ज हो चुका है। अब सुसाइड करने के बाद उसमें परिजनों के बयान पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने की धारा जोड़ दी जाएगी। पांचों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच की जा रही है। जांच में जो निकलेगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।