शोरी मार्केट से माल गोदाम रोड तक… ऊपर गोदाम, नीचे दुकान
क्या रोहतक के बाजारों में बढ़ रहा आग का खतरा
अग्निकांड के बाद शहर के व्यापारिक ढांचे पर सवाल
अधिकांश बाजारों में एक जैसा पैटर्न
रोहतक: डी पार्क पर हालिया अग्निकांड ने शहर के बाजारों की फायर सेफ्टी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एशिया की प्रमुख कपड़ा मंडी शोरी मार्केट, किला रोड, रेलवे रोड, माल गोदाम रोड समेत कई पुराने व्यापारिक क्षेत्रों में वर्षों से एक ही व्यवस्था देखने को मिलती है। नीचे दुकानें संचालित होती हैं, जबकि ऊपर की मंजिलों को गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कपड़ा, पैकिंग सामग्री, रेडीमेड परिधान और अन्य ज्वलनशील सामान बड़ी मात्रा में इन्हीं गोदामों में रखा जाता है।
व्यापारियों की सुविधा के लिहाज से यह व्यवस्था भले ही उपयोगी मानी जाती हो, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आग लगने की स्थिति में यही ढांचा सबसे बड़ा जोखिम बन सकता है। खासकर तब, जब अधिकांश इमारतों में ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए केवल एक ही सीढ़ी हो।
शोरी मार्केट: कपड़े के कारोबार का केंद्र, सुरक्षा पर भी सवाल
रोहतक की सबसे बड़ी कपड़ा मार्केट मानी जाने वाली शोरी मार्केट में बड़ी संख्या में दुकानों के ऊपर गोदाम बने हुए हैं। दिनभर ग्राहकों, कर्मचारियों और व्यापारियों की भीड़ रहती है। यदि किसी भवन में आग लगती है तो नीचे मौजूद लोगों के साथ-साथ ऊपर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा भी चुनौती बन सकती है।
किला रोड और रेलवे रोड पर भी यही व्यवस्था
किला रोड और रेलवे रोड के पुराने बाजारों में भी अधिकांश भवनों का ढांचा इसी प्रकार का है। कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और समय के साथ उनमें व्यापार तो बढ़ा, लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई गई। कई स्थानों पर संकरी सीढ़ियां और सीमित निकास मार्ग जोखिम को और बढ़ा देते हैं।
माल गोदाम रोड पर भंडारण ज्यादा, खतरा भी बड़ा
माल गोदाम रोड क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर माल का भंडारण भी होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां ज्वलनशील सामान अधिक मात्रा में रखा जाता है, वहां आग की तीव्रता और फैलाव की गति भी अधिक होती है।
रोहतक के बाजारों की आम तस्वीर
शहर के अधिकांश पुराने बाजारों में यह एक सामान्य व्यवस्था बन चुकी है कि नीचे दुकान और ऊपर गोदाम बनाया जाता है। कई व्यापारियों के लिए यह जगह और लागत बचाने का तरीका है, लेकिन आग जैसी आपदा में यही मॉडल जानलेवा साबित हो सकता है। ऊपर जमा माल आग को तेजी से फैलाता है, जबकि नीचे मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलने का समय कम हो जाता है।
एक सीढ़ी पर टिकी रहती है पूरी सुरक्षा
अधिकांश भवनों में आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। आग और धुआं फैलते ही सीढ़ियां प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में ऊपर मौजूद लोगों के पास बचाव का दूसरा विकल्प नहीं बचता।
सुरक्षा के लिए क्या किया जा सकता है
गोदामों का सुरक्षा ऑडिट हो
जहां बड़ी मात्रा में कपड़ा या अन्य ज्वलनशील सामान रखा जाता है, वहां नियमित फायर सेफ्टी जांच होनी चाहिए।
हर मंजिल पर अग्निशमन उपकरण हों
केवल दुकान में नहीं, बल्कि गोदामों में भी पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर और अलार्म लगाए जाएं।
कम से कम 2 दरवाजे जरूर हों
नई और पुरानी दोनों तरह की इमारतों में वैकल्पिक निकास व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाए।
बिजली व्यवस्था की नियमित जांच हो
शॉर्ट सर्किट की आशंका को देखते हुए वायरिंग और लोड की समय-समय पर जांच जरूरी है।
मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण शुरू हो
व्यापारियों और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में बचाव के उपायों की ट्रेनिंग दी जाए।

