Saturday, June 13, 2026
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PGI रोहतक की नई ओपीडी में प्रत्येक बुधवार को संचालित होगा विशेष ब्रेस्ट कैंसर क्लिनिक

रोहतक : महिलाओं में बढ़ते स्तन कैंसर के मामलों को देखते हुए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (PGIMS), रोहतक ने स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान एवं समग्र उपचार सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

संस्थान प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार सर्जरी विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नित्याशा दराल को कक्ष संख्या 266, चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी में संचालित होने वाले ब्रेस्ट कैंसर क्लिनिक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह क्लिनिक प्रत्येक बुधवार को कार्य करेगा तथा रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श, स्क्रीनिंग, जांच एवं उपचार संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. एच. के. अग्रवाल ने कहा कि “पीजीआईएमएस रोहतक प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों के कैंसर रोगियों को उच्चस्तरीय एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान में कैंसर रोगियों के लिए स्क्रीनिंग, आधुनिक जांच सुविधाएं, कैंसर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, पैथोलॉजी एवं अन्य सहयोगी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हैं। हमारा प्रयास है कि मरीजों को उपचार के लिए विभिन्न संस्थानों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें समग्र कैंसर देखभाल ‘एक ही छत के नीचे’ प्राप्त हो।”

उन्होंने कहा कि कैंसर के विरुद्ध लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच तथा शीघ्र उपचार सबसे प्रभावी हथियार हैं और पीजीआईएमएस इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक पीजीआईएमएस रोहतक ने बताया कि “स्तन कैंसर की समय पर पहचान से उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। संस्थान का उद्देश्य रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श, आधुनिक उपचार एवं बेहतर फॉलो-अप सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।”
डॉ. कुंदन ने बताया कि पीजीआईएमएस में स्तन कैंसर रोगियों के लिए आधुनिक कैंसर सर्जरी, ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी, संशोधित रेडिकल होल ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन एवं इम्प्लांट बेस्ड रिकंस्ट्रक्शन, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी तथा बहु-विषयक (Multidisciplinary) उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं.
इस अवसर पर डॉ. नित्याशा दराल, वरिष्ठ प्रोफेसर, सर्जरी विभाग ने बताया कि स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग दो लाख नए स्तन कैंसर रोगी सामने आते हैं और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि रोग का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए तो अधिकांश मरीजों का सफल उपचार संभव है।

उन्होंने महिलाओं से नियमित स्तन स्व-परीक्षण (Breast Self-Examination) करने तथा किसी भी गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने का आग्रह किया।

पीजीआईएमएस प्रशासन ने आमजन, विशेषकर 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं तथा उच्च जोखिम समूह की महिलाओं से नियमित जांच एवं समय-समय पर विशेषज्ञ परामर्श लेने की अपील की है, जिससे स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

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