कविता.रोहतक : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता के बीच अब लोग अपनी पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) में बदलवाने में रुचि दिखा रहे हैं। दिल्ली समेत कुछ शहरों में निजी कंपनियां इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट लगाकर पेट्रोल या डीजल कारों को बैटरी से चलने वाले वाहन में बदलने की सुविधा दे रही हैं। हालांकि हरियाणा में इस व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं सामने नहीं आई हैं, जिससे वाहन मालिकों के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वाहन के मूल ढांचे और तकनीकी प्रणाली में बदलाव करना सामान्य काम नहीं है। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों, विभागीय मंजूरी और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि वाहन में बड़े बदलाव करने से पहले नियमों और अनुमतियों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
क्या है इलेक्ट्रिक कन्वर्जन
इलेक्ट्रिक कन्वर्जन वह प्रक्रिया है, जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी सिस्टम लगाया जाता है। इसके बाद वाहन ईंधन की बजाय बिजली से चलता है। कई कंपनियां इसे पुरानी गाड़ी को दोबारा उपयोगी बनाने और ईंधन खर्च कम करने का विकल्प बता रही हैं।
क्यों बढ़ रहा है लोगों का रुझान
लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने वाहन चलाने का खर्च बढ़ा दिया है। वहीं पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बढ़ती जागरूकता भी लोगों को इस दिशा में आकर्षित कर रही है। कई वाहन मालिकों का मानना है कि पुरानी कार को इलेक्ट्रिक बनवाना नई ईवी खरीदने की तुलना में कम खर्चीला हो सकता है।
हरियाणा में क्या हैं चुनौतियां
हरियाणा में फिलहाल निजी वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को लेकर अलग से कोई स्पष्ट नीति या व्यापक दिशा-निर्देश नहीं हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को यह समझना जरूरी है कि किसी भी बड़े तकनीकी बदलाव के लिए विभागीय नियमों और मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है। नियमों की अनदेखी आगे चलकर कानूनी परेशानियां बढ़ा सकती है।
सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ सुमित के अनुसार इलेक्ट्रिक कन्वर्जन केवल इंजन बदलने तक सीमित नहीं है। इसमें बैटरी, मोटर, वायरिंग, कंट्रोल यूनिट और अन्य सुरक्षा प्रणालियों का सही तरीके से इंस्टॉल होना बेहद जरूरी है। यदि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया तो तकनीकी खराबी या आग लगने जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
बीमा और रजिस्ट्रेशन पर भी पड़ सकता है असर
वाहन में बड़े तकनीकी बदलाव होने पर उसके रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और बीमा दस्तावेजों में भी आवश्यक संशोधन कराना पड़ सकता है। यदि वाहन में किए गए बदलावों की जानकारी संबंधित विभागों और बीमा कंपनी को नहीं दी गई तो दुर्घटना की स्थिति में बीमा क्लेम या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में दिक्कत आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कन्वर्जन से पहले नियमों और दस्तावेजी प्रक्रिया की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर लागू आयु सीमा और बढ़ते ईंधन खर्च के कारण इलेक्ट्रिक कन्वर्जन चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी फैसले से पहले सुरक्षा, वैधता और सरकारी नियमों को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

