Tuesday, October 6, 2026
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दिवाली दूर, गली-गली पटाखों का कारोबार शुरू, बिक्री पर लगाम कौन लगाएगा?

कविता.रोहतक: दिवाली अभी दूर है, लेकिन शहर में पटाखों का बाजार पहले ही सजने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार बाजार प्रशासन की तय जगह पर नहीं, बल्कि गली-मोहल्लों से लेकर दुकानों और घरों तक फैलता नजर आ रहा है। पटाखों की बिक्री के लिए न अभी तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन सामने आई है और न ही प्रशासन ने बिक्री के लिए निर्धारित स्थान तय किया है। हर साल लाइसेंस जारी कर पटाखों की बिक्री को एक निश्चित स्थान तक सीमित किया जाता है, ताकि भीड़भाड़ वाले बाजारों में किसी हादसे की स्थिति में बड़ा नुकसान न हो। लेकिन इस बार व्यवस्था कब बनेगी, इस पर प्रशासन की ओर से अभी तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब दिवाली सिर पर है तो बारूद के इस कारोबार की निगरानी कब शुरू होगी।

शहर में कई जगह छोटी दुकानों और घरों से पटाखों की बिक्री शुरू होने की बात सामने आ रही है। कहीं कुछ पैकेट तो कहीं बड़ी संख्या में पटाखे रखे नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि ग्राहक को पटाखे खरीदने के लिए किसी निर्धारित बाजार तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ रही। गली-मोहल्लों में ही पटाखे उपलब्ध होने लगे हैं। अगर अभी से यही स्थिति है तो दिवाली के नजदीक पहुंचते-पहुंचते यह कारोबार कितना फैल जाएगा, यह बड़ा सवाल है।

लाइसेंस और तय जगह की व्यवस्था आखिर कब

हर साल प्रशासन की ओर से पटाखों की बिक्री के लिए नियम तय किए जाते हैं और लाइसेंस जारी किए जाते हैं। साथ ही बिक्री के लिए निर्धारित स्थान भी तय किया जाता है, ताकि पटाखों को भीड़भाड़ वाले बाजारों और रिहायशी इलाकों से दूर रखा जा सके। इस बार अभी तक ऐसी व्यवस्था जमीन पर दिखाई नहीं दे रही। न बिक्री स्थल स्पष्ट है और न ही लाइसेंस व्यवस्था को लेकर आम लोगों और दुकानदारों के बीच स्थिति साफ है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

छोटी सी चिंगारी, बड़ा हादसा कर सकती है

पटाखों की बिक्री को निर्धारित स्थान पर रखने के पीछे सुरक्षा सबसे बड़ा कारण है। बाजारों में दुकानों के बीच पटाखों का भंडारण या बिक्री किसी बड़े खतरे को न्योता दे सकती है। एक छोटी सी चिंगारी भी आग को देखते ही देखते विकराल रूप दे सकती है। खासकर रिहायशी इलाकों में घरों और छोटे गोदामों में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे जाने की स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हादसा होने का इंतजार करने के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।

गोदामों में भरा बारूद, जांच तो करें

शहर में अवैध रूप से पटाखों का भंडारण भी किया जा रहा है। कई जगह घरों, दुकानों और गोदामों में पटाखे जमा किए जाने की बात कही जा रही है। यदि बिना अनुमति बड़ी मात्रा में पटाखों का स्टॉक किया जा रहा है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। प्रशासन और संबंधित विभागों को पटाखों के संभावित गोदामों की जांच कर यह पता लगाने की जरूरत है कि कहीं शहर के बीचोंबीच बारूद तो जमा नहीं किया जा रहा।

शिकंजा कसने की जरूरत

दिवाली की खरीदारी बढ़ने के साथ पटाखों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में अभी से निगरानी नहीं की गई तो आखिरी समय में कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है। प्रशासन को लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक करने के साथ बिक्री के लिए निर्धारित स्थान तय करना होगा और अवैध दुकानों व गोदामों पर भी नजर रखनी होगी। जब हर साल पटाखों की बिक्री के लिए व्यवस्था पहले से तय रहती है तो इस बार अब तक तस्वीर साफ क्यों नहीं है। शहर में बारूद का बाजार फैलने से पहले प्रशासन की कार्रवाई जरूरी है।

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