कविता.रोहतक : शहर में मानसून की दस्तक के साथ ही नगर निगम ने अभियान के तहत नालों से गाद निकालने और मुख्य मार्गों की सफाई का दावा किया है। निगम का कहना है कि यह अभियान जलभराव रोकने और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए चलाया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मानसून पहले से तय समय पर आता है तो नालों की सफाई बारिश शुरू होने के बाद क्यों की जा रही है? हालांकि नालों की सफाई पहले शुरू कर दी गई थी, लेकिन काम धीमी गति से चला और नालों की सफाई कुछ समय पहले शुय होनी चाहिए थी। जिससे बरसात आने तक सभी नाले साफ हो जाएं।
शुक्रवार को हुई पहली बारिश ने शहर के कई हिस्सों में जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी। यदि शुरुआती बारिश में ही कई स्थानों पर पानी जमा होने लगा तो आगामी दिनों में लगातार बारिश होने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में निगम की वर्तमान कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह तैयारी है या फिर केवल नुकसान होने के बाद की कवायद। नालों की डी-सिल्टिंग का काम अप्रैल से जून के बीच पूरा हो जाना चाहिए, ताकि मानसून शुरू होने तक पूरी जल निकासी व्यवस्था सुचारु रहे। यदि बारिश के दौरान ही गाद निकाली जाएगी तो एक ओर जल निकासी प्रभावित होगी, दूसरी ओर सड़कों पर फैली गाद और कीचड़ लोगों की परेशानी बढ़ाएगी।
बारिश से पहले क्यों नहीं हुई तैयारी
हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद इस बार भी निगम का विशेष अभियान बारिश शुरू होने के बाद शुरू हुआ। सवाल यह है कि यदि समय रहते सफाई हो जाती तो पहली ही बारिश में जलभराव की आशंका कम हो सकती थी।
बारिश ने बढ़ाई चिंता
शुक्रवार को हुई बारिश के बाद कई क्षेत्रों में पानी जमा होने की शिकायतें सामने आईं। यदि शुरुआती बारिश में ही जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नजर नहीं आई तो लगातार बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ सकती है। शहर के कई निचले इलाकों में हर वर्ष जलभराव की समस्या दोहराई जाती रही है।
बरसात में सफाई से बढ़ती हैं मुश्किलें
मानसून के दौरान नालों से निकाली गई गाद लंबे समय तक किनारे पड़ी रहती है। दोबारा बारिश होने पर यही गाद वापस नालों में बह जाती है या सड़क पर फैलकर कीचड़ बनाती है। इससे सफाई अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े होते हैं और आम लोगों की परेशानी बढ़ती है।
हर साल दोहराता है वही संकट
रोहतक में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। कई प्रमुख सड़कें और कॉलोनियां हर मानसून में पानी भरने से प्रभावित होती हैं। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं देती। हर वर्ष बारिश के बाद सफाई अभियान और जल निकासी सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन समस्या फिर सामने आ जाती है।
अब निगम के सामने बड़ी चुनौती
नगर निगम ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर शिकायतों के त्वरित समाधान का दावा किया है, लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों की बारिश में होगी। यदि नालों की सफाई, गाद का तत्काल उठान और जल निकासी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही तो शहर एक बार फिर जलभराव, ट्रैफिक जाम और संक्रामक बीमारियों के खतरे से जूझ सकता है। ऐसे में नागरिकों की नजर अब निगम के दावों से ज्यादा जमीनी व्यवस्था पर रहेगी।


