Wednesday, September 9, 2026
Homeदेशमहादान को सलाम! जाते-जाते 6 जिंदगियां रोशन कर गई फौजी की पत्नी

महादान को सलाम! जाते-जाते 6 जिंदगियां रोशन कर गई फौजी की पत्नी

Rohtak News : यह कहानी आंसुओं से भीगी है, लेकिन इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी है। सेना के एक जवान की 30 साल की पत्नी, दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों की मां, राजस्थान की रहने वाली एक महिला को अचानक ब्रेन हेमरेज हो गया। परिवार ने चंडी मंदिर स्थित कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर कैंट में इलाज के लिए भर्ती कराया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने महिला को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

जिस घर में दो छोटे बच्चों की किलकारी गूंजती थी, वहां मातम पसर गया। पति के कंधों पर एक तरफ देश की रक्षा के साथ दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ पत्नी के बिछड़ने का असहनीय दर्द। लेकिन इसी दर्द और गम के बीच उस जवान पति ने वो साहसिक और महान फैसला लिया, जिसने आज चार लोगों की जिंदगी बचा ली और कई परिवारों को रोने से बचा लिया।

 पति ने भारी मन से अपनी पत्नी के अंगदान के लिए हामी भर दी

इस महान दान की जानकारी देते हुए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह केवल अंगदान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा बलिदान है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि फौजी परिवार ने देश की रक्षा करते हुए तो बलिदान दिया ही था, आज एक फौजी की पत्नी ने जाते-जाते भी देश के लोगों को जीवन दान दे दिया। 30 साल की उम्र में दो छोटे बच्चों को छोड़कर जाना बेहद दर्दनाक है, लेकिन उनके पति ने जिस हिम्मत का परिचय दिया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपने निजी दुख को भूलकर दूसरों के घरों में उजाला करने का फैसला किया। ऐसी महान आत्मा को हम सब नमन करते हैं। कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि महिला के अंगदान से कुल छह लोगों को नया जीवन मिला है।

 कुलपति की पूरे प्रदेश से अपील

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने पूरे हरियाणा और देशवासियों से अपील की कि इस परिवार के जज्बे को सलाम करें और अंगदान के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक में अंगदान के लिए हमेशा काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आज उस मां के दो मासूम बच्चे भले ही मां के बिना बड़े होंगे, लेकिन उन्हें जीवन भर इस बात पर गर्व रहेगा कि उनकी मां मर कर भी पांच लोगों की मां बन गई। वह पांच लोगों के शरीर में हमेशा जिंदा रहेंगी।

एक मां के जाने से छह घरों में लौटी खुशियां

सोटो हरियाणा की स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष और पीजीआईएमएस के निदेशक डॉक्टर एस के सिंघल ने बताया कि जानकारी के अनुसार महिला द्वारा किए गए अंगदान के तहत सोटो, रोटो और नोटो द्वारा सारी रात अंगों को नियमानुसार अलोट किया गया, जिसके तहत –

  • किडनी- कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर कैंट में भर्ती एक मरीज को मिली।
  • किडनी- पीजीआईएमएस रोहतक को मिली, जहां किडनी फेलियर से जूझ रहे मरीज को नई जिंदगी मिलेगी।
  • लिवर- आर्मी के रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली को भेजा गया, जहां लिवर फेलियर के मरीज का जीवन बचेगा।
  • कॉर्निया- दोनों कॉर्निया चंडीमंदिर हॉस्पिटल को ही मिले, जिससे दो नेत्रहीन लोगों की दुनिया फिर से रोशन होगी।
  • हृदय– नोएडा के अस्पताल में भेजा गया, जिसके लिए उसको मौहाली से एयरलिफ्ट किया गया।

फौजी का दिल सबसे बड़ा होता है: निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल

पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह खबर सुनकर पूरा पीजीआईएमएस परिवार भावुक है। डॉ. सिंघल ने कहा कि हम रोज मरीजों को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब एक 30 साल की मां, दो बच्चों की मां हमारे बीच से चली जाती है तो दिल टूट जाता है। लेकिन उसके पति के फैसले ने हमें यह सिखाया है कि फौजी का दिल सबसे बड़ा होता है, जिसने अपनी पत्नी को अंतिम विदाई एक महान दान के साथ दी। पीजीआईएमएस को जो किडनी मिली है, वह यहां भर्ती एक जरूरतमंद मरीज को लगाई जाएगी। यह हमारे लिए सिर्फ एक किडनी नहीं, बल्कि एक शहादत की निशानी है। हम उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

कुलसचिव डॉक्टर रूप सिंह ने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक में अब अंगदान को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और ऐसे साहसिक परिवारों की वजह से ही डोनर और रिसीवर के बीच का गैप कम हो रहा है।

आंखें दान कर गईं, ताकि कोई और अपनी मां को देख सके: चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल

पीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने इस घटना को बेहद मार्मिक बताते हुए कहा कि एक महिला के लिए उसके बच्चे ही उसकी पूरी दुनिया होते हैं। डॉ. मित्तल ने कहा कि सोचिए, उस पति पर क्या बीती होगी जिसके दो छोटे बच्चे मां के आंचल के लिए रो रहे होंगे। लेकिन उस पिता ने सोचा कि मेरी पत्नी तो चली गई, लेकिन उसकी आंखों से कोई और अपनी मां को देख सकेगा, उसके हद्य,लिवर और किडनी से किसी और के बच्चे अनाथ होने से बच जाएंगे। इससे बड़ा और पवित्र सोच कोई नहीं हो सकता। डॉ कुंदन मित्तल ने सभी लोगों से अपील की कि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करें। उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, लेकिन अंगदान करके हम मर कर भी कई लोगों में जिंदा रह सकते हैं।

 राजस्थान से चंडीमंदिर तक और चंडीमंदिर से पूरे देश में फैला उजाला

सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉक्टर सुखबीर सिंह ने बताया कि यह परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। सेना में तैनाती के कारण चंडीमंदिर में रह रहा था। ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर स्थिति के बाद जब चंडीमंदिर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड की पुष्टि की, तो आर्मी अस्पताल चंडीमंदिर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर कर्नल डॉ अनुराग की टीम ने परिवार को अंगदान के लिए काउंसलिंग की। शुरुआत में परिवार सदमे में था, लेकिन पति ने खुद को संभाला और कहा कि मेरी पत्नी तो वापस नहीं आएगी, लेकिन उसके अंगों से अगर किसी का सुहाग बचेगा, किसी के बच्चे की मां बच जाएगी, तो मेरी पत्नी की आत्मा को शांति मिलेगी।

सारी रात जागे कुलपति डाॅ. अग्रवाल 

जनसपंर्क विभाग के सीनियर प्रो इंचार्ज डाॅ. मंजूनाथ बीसी ने बताया कि रात को ही अंगों का आंवटन शुरू होते ही ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू की गई। पहली बार इतना बडा ग्रीन कोरिडोर बनने के चलते कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल खुद भी सोटो हरियाणा की टीम के साथ पूरी रात जागते रहे और पल-पल की जानकारी लेते रहे ताकि तथा जरूरी दिशा-निर्देश देते रहे, ताकि रास्ते में एक मिनट की भी देरी न हो और अंगदान में किसी भी प्रकार की समस्या न आए। डाॅ. मंजूनाथ ने बताया कि डाॅ. अग्रवाल अल सुबह भी चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का हौंसला बढाने के लिए खुद आए और टीम को अंग लेने के लिए चंडीमंदिर रवाना किया।

मां की शहादत को सलाम करने खुद पहुंचे कुलपति, फूलों की राह से ओटी तक लाई गई किडनी

यह नजारा किसी वीआईपी के स्वागत का नहीं था, यह स्वागत एक मां की शहादत का था। चंडीमंदिर से जब सेना के जवान की 30 साल की पत्नी की किडनी ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पीजीआईएमएस रोहतक पहुंची, तो उसकी शहादत को सलाम करने के लिए खुद यूएचएस के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल सहित पूरा प्रशासन गेट पर पहुंच गया। जैसे ही सूचना मिली कि अंगदान की किडनी लेकर एंबुलेंस पीजीआईएमएस गेट पर पहुंचने वाली है, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल, निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल, कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल और सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह अपनी टीम के साथ ओर सैकड़ों चिकित्सक,विद्यार्थी गेट के बाहर कतार में खड़े हो गए।

किसी मां के इस महान दान को सम्मान देने के लिए सभी ने सेंट्रल स्टोर से लेकर मॉड्यूलर ओटी तक पूरे रास्ते पर फूल बिछा दिए गए थे। जैसे ही किडनी बॉक्स को लेकर एंबुलेंस आई, सभी अधिकारियों ने हाथ जोड़कर सिर झुकाकर उस महान मां को अंतिम सलाम किया। इसके बाद फूलों से सजी राह पर किडनी बॉक्स को पूरे सम्मान के साथ मॉड्यूलर ओटी तक ले जाया गया। वहां खड़े सैकड़ों डॉक्टर, नर्स और कर्मचारियों की आंखें नम थीं।

इस मौके पर कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा कि हम आज किसी मरीज का इलाज करने नहीं, एक शहीद मां को सलाम करने आए हैं। एक फौजी की पत्नी ने दो छोटे बच्चों की मां होते हुए भी जो साहस दिखाया है, वह शब्दों से परे है। वह खुद चली गई, लेकिन जाते-जाते छह लोगों को जीवन दे गई। आज जो किडनी यहां आई है, वह सिर्फ एक अंग नहीं है, वह उस मां का आशीर्वाद है। इसलिए हम सभी अधिकारी खुद यहां खड़े होकर फूलों से उसका स्वागत कर रहे हैं। यह पीजीआईएमएस परिवार की तरफ से उस फरिश्ते को सच्ची श्रद्धांजलि है।

हरियाणा में पहली बार इतना बड़ा ग्रीन कॉरिडोर, कुलपति ने खुद की मॉनिटरिंग: डीजीपी और हरियाणा पुलिस का जताया आभार

इस पूरे अंगदान को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका ग्रीन कॉरिडोर की रही। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि चंडीमंदिर से रोहतक और रोहतक से दिल्ली तक अंगों को समय पर पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने स्वयं हरियाणा के डीजीपी से बात की। डॉ. अग्रवाल के आग्रह पर डीजीपी अजय सिंघल ने तुरंत पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट पर ग्रीन कॉरिडोर बनवाया। यह हरियाणा में पहली बार था जब अंगदान के लिए इतना लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

कुलपति डॉ. अग्रवाल ने इसके लिए हरियाणा पुलिस, पंजाब पुलिस , चंडीगढ पुलिस और करीब आधा दर्जन जिलों के तमाम पुलिस अधिकारियों का दिल से धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा की हरियाणा पुलिस डीजीपी श्री अजय सिंघल ने जिस तत्परता और सम्मान के साथ इस ग्रीन कॉरिडोर को बनाया, वह काबिले-तारीफ है। पुलिस के जवान सारा दिन सड़कों पर तैनात रहे ताकि एक मां का आशीर्वाद समय पर जरूरतमंदों तक पहुंच सके। यह हरियाणा पुलिस का मानवता के नाम पर बहुत बड़ा योगदान है।

RELATED NEWS
spot_img

Most Popular