Tuesday, August 11, 2026
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सावन शिवरात्रि पर रोहतक में शिवालयों में गूंजे हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारे

रोहतक : सावन शिवरात्रि के पर मंगलवार को रोहतक के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों से शिवालय गूंज उठे। प्रात: काल से ही शिवभक्तों ने शिवलिंग पर कच्चा दूध, धतुरा, भांग, दही, बादाम, गंगाजल, तुतली व बेल के पत्तों, फल-फ्रूट, फल से भगवान शिव की पूजा अर्चना करके सुख-समृद्धि की कामनाएं की। शिवभक्तों ने हरिद्वार से लाई कावड़ का पूजन कर जलाभिषेक किया।

वहीं रोहतक के माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री जी के सानिध्य में मंगलवार को सावन माह की शिवरात्रि पर्व धूमधाम और भक्तिभाव से मनाया गया। गद्दीनशीन संचालिका साध्वी मानेश्वरी देवी ने भक्तों संग शिवलिंग पर महामृत्युंजय मंत्र जाप किया । उन्होंने मंत्रोच्चारण तथा विधि-विधानुसार बोले तेरी बम बम बम बोले और ओउम नम: शिवाय के जयघोषों के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक व रुद्राभिषेक किया। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।

भोले दी बारात चढ़ी गज-वज के … भजन पर झूमे शिवभक्त

भजन संध्या में आया आया रे शिवरात्रि का त्यौहार आया, भोले दी बारात चढ़ी गज-वज के सारेया ने भंग पीती रज-रज के, खाले बाजरे की रोटी भोलेनाथ…, भोले मैं ना चलूंगी तेरे साथ…, मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी भक्ति गीतों पर गद्दीनशीन परमश्रद्धेया मानेश्वरी देवी व शिवभक्त भक्ति में नाचते-गाते और झूमते नजर आए। कार्यक्रम में साध्वी मानेश्वरी देवी के प्रवचन, हवन, कीर्तन, भजन संध्या और भंडारे का आयोजन हुआ।

भगवान शिव अत्यंत दयालु, कृपालु व भोले हैं : साध्वी मानेश्वरी देवी

शिवरात्रि पर्व पर प्रवचन देते हुए साध्वी मानेश्वरी देवी ने बताया कि सावन माह की शिवरात्रि पर जो भक्त सच्चे मन से महादेव की पूजा अर्चना व जलाभिषेक करता है उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख शांति, समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है व उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अत्यंत दयालु, कृपालु व भोले हैं। सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामनायें पूर्ण होती है।

भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने घोर तपस्या की थी  : साध्वी मानेश्वरी देवी

उन्होंने कहा कि शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर अत्यंत कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर केवल सूखे बिल्वपत्र खाए और बाद में उनका भी त्याग कर दिया, जिससे उन्हें ‘अपर्णा’ नाम मिला। उनकी इस अडिग भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें स्वीकार किया।

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