Punjab News : शिरोमणि अकाली दल की चुनावी घोषणापत्र समिति की बैठकों के बाद, डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी घोषणापत्र को अंतिम रूप देने से पहले पंजाब समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सीधी बातचीत कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और बाजीगर समुदायों के प्रतिनिधियों से उनके मुद्दों और उम्मीदों के बारे में सुझाव मांगे गए।
चीमा ने बताया कि निकट भविष्य में युवाओं, महिलाओं, NRI, सरकारी कर्मचारियों, किसानों, व्यापारियों और विभिन्न संगठनों के साथ भी विचार-विमर्श किया जाएगा। उनके अनुसार, पार्टी का लक्ष्य ऐसा घोषणापत्र तैयार करना है जिसमें केवल वही वादे हों जिन्हें पार्टी के सरकार बनाने पर व्यावहारिक रूप से पूरा किया जा सके। डॉ. चीमा ने घोषणापत्र को कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज बनाने की अपनी पुरानी मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता से वादे करने से पहले अपने संसाधनों और क्षमताओं का आकलन करना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने GMADA में ED की कार्रवाई के संबंध में पंजाब सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया और कहा कि किसी भी मामले में जांच और सच्चाई का पता लगाने का काम कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग के संबंध में, उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा तभी मजबूत बना रहेगा जब यह संस्था निष्पक्ष रूप से और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम करे।
चीमा ने दावा किया कि अकाली दल का घोषणापत्र खोखले दावों के बजाय वास्तविकता और उपलब्ध सरकारी संसाधनों के आधार पर तैयार किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार बनने पर पार्टी के पास किए गए वादों को पूरा करने की क्षमता होगी। उन्होंने घोषणापत्र को कानूनी दस्तावेज बनाने की वकालत की और अपने वादों को पूरा करने में विफल रहने वाले राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
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उन्होंने GMADA में ED की कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार पर भी तीखा हमला किया और कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए। GMADA मामले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब सरकार के अपने ही सांसद ने वहां भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, तो ED की कार्रवाई पर आपत्ति क्यों थी। वारंट अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चीमा ने कहा कि साइट पर कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। बीजेपी के बारे में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान पर चीमा ने कहा कि चूंकि वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को उनकी बात पर ध्यान देना चाहिए।
चुनाव आयोग के बारे में बात करते हुए चीमा ने कहा कि आयोग को निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जनता और राजनीतिक दलों का चुनाव आयोग जैसी संस्था पर भरोसा बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।

