कविता.रोहतक: मौसम में अचानक आए बदलाव और सुबह-शाम बढ़ती ठंड का असर अब लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। रोहतक के पीजीआई और सिविल अस्पताल में खांसी-बुखार के मरीज बढ़े हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह बदलते मौसम के अनुसार कपड़ों और दिनचर्या में बदलाव नहीं करना है।
अभी भी कई बच्चे गर्मी के मौसम की तरह आधी बाजू के कपड़े पहनकर स्कूल जा रहे हैं या बाहर खेल रहे हैं। दिन में धूप के कारण गर्मी का एहसास होने से लोग सुबह और रात की ठंड को नजरअंदाज कर रहे हैं। लेकिन मौसम का यह बदलाव सेहत पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सुबह-शाम की ठंड को हल्के में न लें
दिन में तापमान सामान्य महसूस होने के बावजूद सुबह और देर शाम ठंड बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को केवल आधी बाजू के कपड़ों में बाहर भेजना ठीक नहीं है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं और जरूरत के अनुसार स्वेटर या गर्म कपड़े भी साथ रखें। खासकर सुबह स्कूल जाते समय और शाम को बाहर खेलते समय ठंडी हवा से बचाव जरूरी है। मौसम के अनुसार कपड़े पहनने की आदत डालने से बच्चों को अचानक तापमान में होने वाले बदलाव से बचाने में मदद मिल सकती है।
खांसी और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे लाेग
बदलते मौसम के बीच अस्पतालों में खांसी और बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें बच्चों की संख्या अधिक होने की बात सामने आ रही है। मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण समेत सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, हर मरीज में बीमारी का कारण एक जैसा नहीं होता। ऐसे में बच्चों को लगातार खांसी, बुखार, गले में दर्द या कमजोरी होने पर खुद से दवा देने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। लक्षण बढ़ने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
बच्चों के साथ बुजुर्गों का भी रखें ध्यान
बदलते मौसम में बच्चों के अलावा बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण परेशानी बढ़ सकती है। बुजुर्ग सुबह जल्दी और देर शाम बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें। ठंडी हवा से बचें और पर्याप्त आराम करें। घर में बच्चों और बुजुर्गों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाने के साथ उनके खानपान और स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि पहले से कोई बीमारी है तो दवाओं और डॉक्टर की सलाह का नियमित पालन करें।
लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाएं, पौष्टिक भोजन दें और हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें। बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथ धोने और खांसते-छींकते समय मुंह ढकने जैसी आदतें संक्रमण का प्रसार कम करने में मदद करती हैं। बच्चों को बीमार होने पर स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर भेजने से बचें। बुखार लगातार बना रहे, बच्चा सुस्त हो जाए, पानी पीना कम कर दे या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना और समय पर इलाज कराना ही परेशानी को बढ़ने से रोकने का बेहतर तरीका है।

