Sunday, March 3, 2024
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ऑनलाइन पेमेंट करते वक्त रखें सावधानी, वरना लूट जायेगा आपका सारा पैसा

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बीते कुछ सालों से हमारे देश में ऑनलाइन पेमेंट करने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। खुद पीएम मोदी के द्वारा डिजिल पेमेंट की मुहिम चलाई गई थी। आज के दौर में अधिकांश लोग ऑनलाइन पेमेंट करना ही पसंद करते हैं। यूपीआई पेमेंट, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और क्यूआर कोड जैसे कई तरीके हैं जिनके माध्यम से पेमेंट की जाती है।

बीते कुछ महीनों में क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट करने का तरीका काफी पॉपुलर हुआ है। शॉपिंग करते हुए लोग इस तरीके से आसानी से पेमेंट करते हैं। लेकिन अब यही तरीका साइबरक्रिमिनल्स लोगों के लिए एक हथियार बन गया है। ये लोग ऑनलाइन पेमेंट के लिए QR कोड भेजकर लोगों के साथ पैसों की ठगी कर रहे हैं।

QR कोड से जुड़ा ठगी का पहला मामला उस वक्त सामने आया था जब साल 2021 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता से एक व्यक्ति ने ई-कॉमर्स साइट पर खरीददार बनकर 34,000 रुपए की ठगी की थी। हर्षिता ने ई-कॉमर्स साइट पर सोफा बेचने के लिए लिस्ट किया था।

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QR कोड स्कैम के कई मामले सामने आ चुके हैं जहां लोगों से एक हजार रुपए से लेकर लाखों रुपए तक की ठगी हो चुकी है। आमतौर पर स्कैमर्स सेकेंड हैंड ऑनलाइन मार्केट प्लेस जैसे कि Quikr और OLX पर खुद को एक खरीददार के रुप में पेश करते हैं। इसके बाद पीड़ित को मैसेज करते हैं कि वो लिस्ट की गई चीजों को खरीदने के इच्छुक हैं।

स्कैमर्स वॉट्सऐप या फिर दूसरे मैसेजिंग ऐप के जरिए QR कोड भेजते हैं फिर स्कैन करने के लिए कहते हैं ताकि यह कॉन्फर्म हो सके कि बैंक अकाउंट सही है या नहीं। यूजर का भरोसा जीतने के लिए स्कैमर्स छोटे अमाउंट की पेमेंट करते हैं। जब पीड़ित व्यक्ति को पैसे मिल जाते हैं तो स्कैमर्स QR कोड स्कैन करने के लिए कहते हैं ताकि बचा अमाउंट भी उन्हें भेजा जा सके। जैसे ही पीड़ित व्यक्ति QR कोड करता है तो स्कैमर्स उनसे OTP या UPI  पिन एंटर करने के लिए कहते हैं। यहीं से स्कैमर्स आपका सारी डिटेल ले लेते हैं और आपके खाते के पैसे उड़ जाते हैं।

खुद को कैसे रखें सुरक्षित 

यदि आप पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं तो आपको क्यू आर कोड स्कैन करने की सलाह नहीं दी जाती है। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए एक सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करें।

क्यूआर कोड स्कैम से बचने के लिए कभी भी अनजान व्यक्ति के साथ यूपीआई आईडी और बैंक डिटेल्स न शेयर की जाएं। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को वेरिफाई करना भी जरूरी है।

अगर आप क्यूआर कोड स्कैन करते हैं तो फोन में क्यूआर कोड स्कैनर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। ऐसे बहुत से ऐप्स की सुविधा मौजूद है, जिनमें यूआरएल और कंटेंट का प्रीव्यू डेस्टिनेशन पर पहुंचने से पहले ही मिल जाता है।

बड़ी बात क्यूआर कोड का इस्तेमाल पैसे देने के लिए किया जाता है ना कि लेने के लिए इस बात को जरुर ध्यान रखें।

 

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