- डॉ. कुंदन मित्तल के रिटायर होते ही बढ़ी हलचल, अतिरिक्त प्रभार डॉ. सुजाता सेठी को
- स्थायी नियुक्ति और डायरेक्टर की कुर्सी पर कई दावेदार सक्रिय
कविता.रोहतक: पीजीआईएमएस रोहतक में चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के पद से डॉ. कुंदन मित्तल के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। फिलहाल मानसिक रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुजाता सेठी को चिकित्सा अधीक्षक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, लेकिन इसे केवल अंतरिम व्यवस्था माना जा रहा है।
स्थायी चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति को लेकर संस्थान के भीतर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। कई वरिष्ठ डॉक्टर इस पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं और संभावित नामों की सूची भी तैयार होने लगी है।
उधर, पीजीआईएमएस के डायरेक्टर पद को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौजूदा व्यवस्था के बीच कई वरिष्ठ चिकित्सक इस प्रतिष्ठित पद के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। संस्थान के गलियारों में इन दोनों अहम पदों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बनी हुई है।
अभी अतिरिक्त जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति में लगेगा समय
डॉ. कुंदन मित्तल के रिटायर होने के बाद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए डॉ. सुजाता सेठी को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। हालांकि,सूत्रों का कहना है कि स्थायी चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया में अभी समय लग सकता है। ऐसे में कुछ समय तक अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था जारी रहने की संभावना है।
कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने शुरू की दावेदारी
चिकित्सा अधीक्षक का पद पीजीआईएमएस के सबसे अहम प्रशासनिक पदों में माना जाता है। यही कारण है कि कई वरिष्ठ चिकित्सक इस पद के लिए सक्रिय हो गए हैं। संस्थान और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर संभावित नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को लेना है।
डायरेक्टर की कुर्सी पर भी बढ़ी सियासी और प्रशासनिक हलचल
सिर्फ चिकित्सा अधीक्षक ही नहीं, बल्कि पीजीआईएमएस के डायरेक्टर पद को लेकर भी अंदरखाने हलचल तेज है। कई वरिष्ठ डॉक्टर इस पद के लिए अपने स्तर पर संपर्क साध रहे हैं। संस्थान के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले समय में डायरेक्टर पद को लेकर भी बड़ा फैसला हो सकता है।
दो अहम कुर्सियों पर टिकी सबकी नजर
पीजीआईएमएस में चिकित्सा अधीक्षक अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था संभालते हैं, जबकि डायरेक्टर पूरे संस्थान के प्रमुख होते हैं। ऐसे में दोनों पदों पर होने वाली नियुक्तियां संस्थान की कार्यशैली और भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसी वजह से डॉक्टरों और कर्मचारियों की नजर इन दोनों कुर्सियों पर बनी हुई है।
फिलहाल इंतजार, अंतिम फैसला सरकार के हाथ
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा अधीक्षक और डायरेक्टर दोनों पदों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। नियुक्ति प्रक्रिया में प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण समय लग सकता है। तब तक अतिरिक्त प्रभार के सहारे व्यवस्था चलने की संभावना है। संस्थान में सभी की निगाहें अब सरकार और विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं।

