Sunday, September 13, 2026
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ये कैसी सुविधा! पीजीआईएमएस में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार

गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक : हरियाणा के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल पीजीआईएमएस रोहतक इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड जैसी बेसिक जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जो सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करता है। अस्पताल में मशीनें मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं।

रेडियोलॉजी विभाग में केवल दो रेडियोलॉजिस्ट हजारों मरीजों का बोझ उठा रहे हैं। नतीजा यह है कि जहां रोजाना करीब 600 मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती है, वहां सिर्फ 150 जांच ही हो पा रहे हैं।

पूरे हरियाणा का दबाव, सिस्टम हुआ फेल

पीजीआईएमएस पर सिर्फ रोहतक ही नहीं, बल्कि सोनीपत, झज्जर, भिवानी, जींद, हिसार, सिरसा, पानीपत, करनाल, कैथल, यमुनानगर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और फतेहाबाद जैसे जिलों का भी भारी दबाव है। पेट दर्द, किडनी स्टोन, लिवर डिजीज जैसी सामान्य जांचों के लिए भी मरीज महीनों लाइन में लगे हैं।

गरीबों पर दोहरी मार

सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सिर्फ 50 रुपये में होता है, लेकिन जब यहां नंबर नहीं आता, तो मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में यही जांच 700 से 1200 रुपये तक में की जा रही है। यानी एक तरफ इलाज में देरी, दूसरी तरफ जेब पर भारी बोझ। सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।

प्राइवेट सेक्टर की चांदी

सरकारी व्यवस्था की कमजोरी का सीधा फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं। शहर में रोजाना 2500 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड प्राइवेट सेक्टर में किए जा रहे हैं, जिससे यह साफ है कि सरकारी सिस्टम की कमी का आर्थिक फायदा निजी संस्थानों को मिल रहा है।

इमरजेंसी को मिल रही राहत, बाकी मरीज इंतजार में

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, गंभीर और आपातकालीन मामलों को तुरंत जांच की सुविधा दी जा रही है, लेकिन सामान्य मरीजों के लिए लंबा इंतजार अब मजबूरी बन चुका है।

प्रशासन का कहना है कि नए रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सवाल यही है कि जब तक नई नियुक्तियां नहीं होतीं, तब तक मरीजों का क्या होगा।

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