Saturday, June 13, 2026
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सिर पर लटका खतरा, तारों के जाल में कैद रोहतक के बाजार

बिजली का जाल बना खतरा, तारों के मकड़जाल में कितने सुरक्षित हैं रोहतक के बाजार

डी पार्क अग्निकांड के बाद उठे सवाल

किला रोड से गांधी कैंप तक लटकते तार बन रहे जोखिम का कारण, शॉर्ट सर्किट की आशंका ने बढ़ाई चिंता

रोहतक: रोहतक के बाजारों में आग की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन डी पार्क पर हालिया भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। हालांकि आग एसी का कंप्रेशर फटने से लगी थी, लेकिन रोहतक के बाजारों पर एक और खतरा मंडरा रहा है, सभी को पता है, लेकिन अनजान बनकर अनदेखा कर दिया जाता है। सबसे बड़ा सवाल शहर के उन बाजारों पर खड़ा होता है, जहां बिजली के तार मकड़जाल की तरह सड़कों के ऊपर लटक रहे हैं। किला रोड, रेलवे रोड, गांधी कैंप, चमेली मार्केट और आसपास के व्यस्त कारोबारी क्षेत्रों में वर्षों से बिजली के तारों का उलझा हुआ नेटवर्क दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये बाजार किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं?

सिर के ऊपर मौत का जाल, नीचे हजारों की भीड़

किला रोड, रेलवे रोड और चमेली मार्केट जैसे व्यस्त बाजारों में दुकानों के ऊपर बिजली, इंटरनेट और केबल के तार एक-दूसरे में उलझे हुए दिखाई देते हैं। कई जगह तार इतने नीचे लटके हैं कि वाहन चालक और दुकानदार भी उन्हें देखकर असहज महसूस करते हैं। दिनभर हजारों लोग इन रास्तों से गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।

गर्मी बढ़ी तो बढ़ा शॉर्ट सर्किट का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में बिजली की खपत बढ़ने से तारों पर लोड भी बढ़ जाता है। पुराने और जर्जर तार गर्म होकर स्पार्किंग का कारण बन सकते हैं। यदि किसी दुकान में ज्वलनशील सामान रखा हो तो एक छोटी चिंगारी भी बड़े अग्निकांड में बदल सकती है। कपड़ा, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकानों वाले बाजारों में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

गांधी कैंप और रेलवे रोड में ज्यादा चिंता

गांधी कैंप और रेलवे रोड के कई हिस्सों में बिजली के तारों के साथ-साथ निजी केबलों का भी जाल फैला हुआ है। वर्षों पुराने तारों की समय-समय पर जांच नहीं होने से जोखिम बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों सोमनाथ, अनिल दुआ, सुमित, सुनील का कहना है कि कई बार स्पार्किंग की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाता।

आग लगी तो फायर ब्रिगेड भी फंस सकती है

बाजारों में बिजली के उलझे तार केवल आग लगने का कारण ही नहीं बनते, बल्कि राहत और बचाव कार्य में भी बाधा बन सकते हैं। यदि किसी संकरी गली या बाजार में आग लगती है तो ऊपर लटकते तार फायर ब्रिगेड के लिए भी चुनौती बन जाते हैं। कई बाजारों में पहले से ही अतिक्रमण और जाम की समस्या है, ऐसे में आग बुझाने का काम और कठिन हो सकता है।

हादसे के बाद जागने की पुरानी बीमारी

हर बड़े हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। शहर के व्यापारिक क्षेत्रों में बिजली लाइनों का ऑडिट, जर्जर तारों का बदलाव और अवैध कनेक्शनों की जांच लंबे समय से लंबित है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या इस बार स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

पहले सर्वे, फिर सुधार अभियान चलाया जाए

व्यापारियों का मानना है कि बाजारों में बिजली व्यवस्था का संयुक्त सर्वे कराया जाना चाहिए। जहां तारों का अत्यधिक दबाव है, वहां नई लाइनें डाली जाएं। भूमिगत केबलिंग की योजना पर भी गंभीरता से काम होना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के खतरे कम किए जा सकें।

सुरक्षा के टिप्स
आग से बचाव के लिए क्या करें

दुकानदारों के लिए

-दुकान की वायरिंग की नियमित जांच कराएं।
-पुराने और कटे हुए तार तुरंत बदलवाएं।
-ओवरलोडिंग से बचें, एक ही बोर्ड पर कई उपकरण न चलाएं।
-दुकान में फायर एक्सटिंग्विशर जरूर रखें।
-बंद करते समय मुख्य बिजली स्विच ऑफ करें।

प्रशासन के लिए

-बाजारों में बिजली तारों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
-जर्जर और लटकते तारों को तुरंत बदला जाए।
-अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान चलाया जाए।
-प्रमुख बाजारों में भूमिगत केबलिंग की योजना लागू की जाए।
-फायर सेफ्टी और बिजली सुरक्षा का संयुक्त निरीक्षण नियमित हो।

 

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