Wednesday, July 1, 2026
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ग्रामीणों का अल्टीमेटम : 15 दिन में पानी नहीं मिला तो मकड़ौली टोल होगा जाम

रोहतक : गांव मकड़ौली में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। बुधवार को गांव के लोगों की पंचायत जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एक्सईएन से मिलने पहुंची।

ग्रामीणों ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर गांव की पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो मकड़ौली टोल प्लाजा जाम किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि इसके बाद कानून व्यवस्था या आम लोगों को होने वाली किसी भी परेशानी की जिम्मेदारी प्रशासन और विभाग की होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव का करीब आधा हिस्सा लंबे समय से पर्याप्त पेयजल आपूर्ति से वंचित है। कई मोहल्लों में नलों में पानी नहीं आता या बहुत कम दबाव से आता है। इससे लोगों को पीने के पानी के साथ-साथ घरेलू कार्यों के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद केवल आश्वासन मिले, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

एक्सईएन ने ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद जल्द समाधान का भरोसा दिया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि इस बार वे केवल वादों पर भरोसा नहीं करेंगे। यदि 15 दिन के भीतर हालात नहीं सुधरे तो पूरे गांव के लोग एकजुट होकर मकड़ौली टोल पर आंदोलन करेंगे।

15 दिन का अंतिम अल्टीमेटम

ग्रामीणों ने विभाग को 15 दिनों का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में पानी की समस्या दूर नहीं हुई तो मकड़ौली टोल प्लाजा जाम कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीणों के अनुसार गांव के करीब आधे हिस्से में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही। कई मोहल्लों के लोगों को रोजाना पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

कई बार शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।

एक्सईएन से की मुलाकात

पंचायत के प्रतिनिधियों ने जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराया और गांव में पेयजल आपूर्ति को जल्द सुचारु करने की मांग रखी।

विभाग ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा

विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी। अब ग्रामीणों की नजर अगले 15 दिनों पर टिकी है कि समस्या का समाधान होता है या आंदोलन शुरू होता है।

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