कविता.रोहतक: दिल्ली-एनसीआर में इस बार दिवाली के बाद भी पटाखे जलाने को लेकर सख्ती रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर को केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है। इसके लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। यानी दो दिनों में कुल पांच घंटे ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
हालांकि, कोर्ट की ओर से ग्रीन पटाखों को अनुमति मिलने के बाद भी रोहतक में इनके लाइसेंस और बिक्री की प्रक्रिया को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। दूसरी तरफ बाजार मंप पारंपरिक पटाखे पहले से ही उपलब्ध हैं और लोग इनका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती आदेश को जमीन पर लागू करवाने की होगी।
रोहतक में दो दिन और पांच घंटे ही पटाखे जलाने की छूट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, रोहतक में 7 और 8 नवंबर को ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी। इसके लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है। इन निर्धारित समय के अलावा पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। खास बात यह है कि यह छूट सभी तरह के पटाखों के लिए नहीं, बल्कि केवल ग्रीन पटाखों के लिए है। ऐसे में निर्धारित समय में भी पारंपरिक पटाखे जलाने वालों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। रोहतक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश प्रभावी होंगे।
ग्रीन पटाखों पर मुहर, लाइसेंस की प्रक्रिया पर संशय
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन रोहतक में इनकी बिक्री और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पटाखों की बिक्री के लिए दुकानदारों को किस विभाग से अनुमति लेनी होगी, लाइसेंस कब जारी होंगे और ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे की जाएगी, इन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। ऐसे में दुकानदारों के साथ आम लोगों के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि समय रहते प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए तो अनुमति मिलने के बावजूद ग्रीन पटाखों की उपलब्धता चुनौती बन सकती है।
बाजार में पारंपरिक पटाखे, प्रतिबंध लागू करवाना बड़ी चुनौती
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में पारंपरिक पटाखे पहले से मौजूद हैं। लोग भी सामान्य पटाखों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पारंपरिक पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल जारी है तो उन पर रोक कैसे लगेगी। केवल आदेश जारी करने से प्रतिबंध प्रभावी नहीं होगा, बल्कि इसके लिए बाजारों में निगरानी, दुकानों की जांच और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी होगी। प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती रहेगी कि निर्धारित दो दिनों में भी केवल ग्रीन पटाखे ही जलाए जाएं और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री न हो।
अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर दायरे में नो-क्रैकर जोन
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों और वृद्धाश्रमों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक लगाई है। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन को भी नो-क्रैकर जोन घोषित करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों की उचित मार्किंग करवाने और लोगों को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया है। रोहतक में पीजीआईएमएस, सिविल अस्पताल, निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और शिक्षण संस्थानों के आसपास इन निर्देशों का पालन करवाना होगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में स्पष्ट संकेतक और जागरूकता व्यवस्था जरूरी होगी।
कम प्रदूषण फैलाने के लिए बनाए गए हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखों को सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। इनमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम किया जाता है, जिससे इनके जलने पर सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और हानिकारक गैसें निकलती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होते हैं। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीमित समय और सीमित दिनों के लिए इन्हें अनुमति दी है। पिछले साल भी कोर्ट ने ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी थी। इस बार भी रोहतक में वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए आदेश का पालन करवाना प्रशासन के लिए अहम रहेगा।

