कविता:रोहतक : सरकारी राशन लेने के लिए अब डिपो पर पहुंचना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। गेहूं और चीनी के वितरण के लिए अलग-अलग अंगूठा लगवाने की व्यवस्था लागू होने से राशन लेने की प्रक्रिया में एक नया चरण जुड़ गया है। इसका मकसद राशन वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना है।
वहीं, राशन कार्ड की श्रेणी और परिवार में सदस्यों की संख्या के आधार पर मिलने वाले राशन का हिसाब भी अलग-अलग है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके परिवार को कितना गेहूं मिलेगा, चीनी के लिए कितनी राशि देनी होगी और डिपो पर किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।
अलग-अलग बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से गुजरना पड़ेगा
सरकारी राशन वितरण में बायोमेट्रिक व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है। अब तक राशन डिपो पर एक बार अंगूठा लगवाकर राशन लेने की प्रक्रिया पूरी हो जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में गेहूं और चीनी के लिए अलग-अलग अंगूठा लगवाना होगा। यानी लाभार्थी को दोनों खाद्य वस्तुओं के लिए अलग-अलग बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से गुजरना पड़ेगा। इससे वितरण प्रणाली में यह दर्ज हो सकेगा कि किस लाभार्थी ने कौन सी वस्तु प्राप्त की है। राशन वितरण में गड़बड़ी और किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर राशन उठाने जैसी संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, लाभार्थियों को अब डिपो पर पहले की तुलना में कुछ अतिरिक्त समय देना पड़ सकता है।
परिवार में पांच सदस्य तो 25 किलो गेहूं, सदस्यों की संख्या से तय होगा हिस्सा
राशन कार्ड की सामान्य श्रेणी में परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर महीने पांच किलो गेहूं देने का प्रावधान है। ऐसे में परिवार में जितने सदस्य होंगे, उसी हिसाब से गेहूं की मात्रा तय होगी। उदाहरण के तौर पर पांच सदस्यों वाले परिवार को महीने में 25 किलो गेहूं मिलेगा। वहीं, अंत्योदय अन्न योजना के कार्डधारकों के लिए व्यवस्था अलग है। उन्हें प्रति परिवार 35 किलो गेहूं दिया जाता है। इसलिए लाभार्थियों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनका राशन कार्ड किस श्रेणी में आता है। कई बार लोग परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर मिलने वाले राशन और अंत्योदय कार्ड पर मिलने वाले राशन को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों की पात्रता और मात्रा अलग-अलग निर्धारित है।
चीनी के लिए चुकाने होंगे 13.50 रुपये प्रति किलो
राशन डिपो पर मिलने वाली चीनी के लिए लाभार्थियों को निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। सरकारी योजना के तहत चीनी का भाव 13.50 रुपये प्रति किलोग्राम तय है। बाजार के मुकाबले नियंत्रित दर पर मिलने वाली चीनी से पात्र परिवारों को राहत मिलती है। खासकर उन परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी है, जिनका घरेलू बजट सीमित है और जिन्हें हर महीने राशन के साथ चीनी की भी जरूरत होती है। नई व्यवस्था में चीनी के लिए अलग अंगूठा लगवाने का प्रावधान होने से इसका वितरण भी अलग से दर्ज होगा। इससे गेहूं और चीनी के वितरण का रिकॉर्ड अलग-अलग रखने में मदद मिलेगी।
राशन कार्ड का रंग भी समझें
राशन वितरण में कार्ड की श्रेणी का विशेष महत्व है। अलग-अलग श्रेणियों के राशन कार्ड के आधार पर परिवारों को मिलने वाले राशन की मात्रा तय होती है। सामान्य राशन कार्ड पर प्रति सदस्य पांच किलो गेहूं मिलता है, जबकि अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति परिवार 35 किलो गेहूं दिया जाता है। ऐसे में केवल परिवार के सदस्यों की संख्या जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने राशन कार्ड की श्रेणी की जानकारी होना भी जरूरी है। लाभार्थियों को अपने राशन कार्ड में दर्ज सदस्यों की संख्या और पात्रता की जांच करते रहना चाहिए। यदि राशन की मात्रा में अंतर दिखाई देता है या बायोमेट्रिक प्रक्रिया में परेशानी आती है तो डिपो संचालक से जानकारी लेकर संबंधित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। इससे राशन लेने के दौरान होने वाली अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।

