कविता.रोहतक
अप्रैल महीने के लिंगानुपात आंकड़ों ने रोहतक जिले के कई गांवों की तस्वीर बदलती हुई दिखाई है। जिले के कुछ गांवों में बेटियों के जन्म ने ऐसा संतुलन बनाया कि वहां का लिंगानुपात हजारों के आंकड़े तक पहुंच गया। ये आंकड़े गांवों में बदलती सामाजिक सोच और बेटियों के प्रति बढ़ते सम्मान की कहानी भी बयान कर रहे हैं। जिले के कुल 158 गांवों में से कुछ चुनिंदा गांवों के आंकड़े यहां हैं, जिनमें कई गांवों ने बेटियों के जन्म के मामले में शानदार प्रदर्शन किया है।
सबसे ज्यादा चर्चा खरक जाटान गांव की हो रही है, जहां अप्रैल में 2 लड़कों के मुकाबले 12 लड़कियों का जन्म दर्ज हुआ और लिंगानुपात 6000 तक पहुंच गया। वहीं डोभ, सामाण-1, भैणी मातो और भैसरू कलां जैसे गांवों ने भी बेटियों के जन्म के मामले में शानदार आंकड़े पेश किए।
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आया है। कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां पूरे महीने एक भी बेटी का जन्म दर्ज नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग अब इन गांवों पर विशेष निगरानी की तैयारी में है। लिंगानुपात बिगड़ने पर 7 आशा वर्कर्स को नोटिस भी दिया गया है।
खरक जाटान बना नंबर-1
अप्रैल के आंकड़ों में खरक जाटान गांव सबसे ऊपर रहा। यहां 2 लड़कों के मुकाबले 12 लड़कियों का जन्म दर्ज हुआ। वहीं डोभ गांव में 3 लड़कों के मुकाबले 13 लड़कियां जन्मीं। सामाण-1 गांव भी पीछे नहीं रहा, जहां 5 लड़कों के मुकाबले 18 लड़कियों ने जन्म लिया।
भैणी मातो, भैसरू कलां और किशनगढ़ ने भी दिखाई शानदार तस्वीर
भैणी मातो और भैसरू कलां गांवों में भी बेटियों की संख्या लड़कों से कई गुना ज्यादा रही। भैणी मातो में 4 लड़कों पर 12 लड़कियां और भैसरू कलां में 3 लड़कों पर 9 लड़कियां जन्मीं। किशनगढ़ गांव में 6 लड़कों के मुकाबले 16 लड़कियों का जन्म हुआ। कंसाला, बेड़वा, भैणी सुरजन और हुमायूपुर भी उन गांवों में शामिल रहे जहां बेटियों ने आंकड़ों में बढ़त बनाई।
कुछ गांवों के आंकड़े चिंता भी बढ़ा रहे
जहां कई गांवों ने सकारात्मक तस्वीर पेश की, वहीं कुछ गांवों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ाई है। तितरी, सामाण-2 और कसरैंटी गांवों में अप्रैल महीने में एक भी लड़की का जन्म दर्ज नहीं हुआ। इंदरगढ़, मसूदपुर और घरौंठी जैसे गांवों में भी लिंगानुपात काफी कम रहा। स्वास्थ्य विभाग अब इन गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने और रिकॉर्ड की गहन समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है।
समाज में बदल रही सोच
अप्रैल के आंकड़ों में कई गांवों ने बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं। बेटियों के जन्म को लेकर लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है और यह समाज के लिए अच्छी बात है। स्वास्थ्य विभाग लगातार पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत निगरानी कर रहा है। जिन गांवों में लिंगानुपात कम है वहां विशेष टीमों के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।- डॉ. रमेश चंद्र, सिविल सर्जन, रोहतक।
सबसे ज्यादा लिंगानुपात वाले 10 गांव
खरक जाटान, डोभ, सामाण, भैणी मातो, भैसरू कलां, किशनगढ़, कांसाला, बेड़वा, भैणी सुरजन, हुमायूपुर
सबसे कम लिंगानुपात वाले 10 गांव
तितरी, सामाण, कसरैंटी, इंदरगढ़, मसूदपुर, घरौंठी, सांपला, लाढ़ौत, गढ़ी सांपला, गढ़ी बोहर
नोटिस जारी किए
जिले के कुछ गांवों में लिंगानुपात सामान्य स्तर से नीचे दर्ज किया गया है। इन गांवों में आशा वर्कर्स को नोटिस जारी किए गए हैं और वहां विशेष सर्वे व मॉनिटरिंग कराई जा रही है। विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड और जन्म आंकड़ों की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

