- स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 में हरियाणा प्रथम, नॉर्थ जोन में रोहतक जिला रहा प्रथम
रोहतक : स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 में हरियाणा के प्रथम स्थान पर रहने तथा जिला रोहतक द्वारा भारत के नॉर्थ जोन में प्रथम स्थान हासिल करने पर महम एवं रोहतक खंड के सरपंचों ने केक काटकर अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार को बधाई दी। अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी सरपंचों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिला के सभी सरपंचों, ग्राम पंचायतों, अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आमजन की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ गांव ही स्वस्थ समाज और बेहतर पर्यावरण की आधारशिला हैं।
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार स्थानीय जिला विकास भवन स्थित अपने कार्यालय में सरपंचों व ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एवं ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर सभी ग्राम पंचायतों को गंभीरता से कार्य करना होगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को 1 अप्रैल से लागू प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि जिला की सभी पंचायतों के साथ-साथ कॉलेज, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्रों तथा अन्य सामुदायिक स्थलों पर फोर-वे सेग्रीगेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कचरे का उचित वर्गीकरण एवं वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में रोहतक द्वारा हासिल किये गए मुकाम को भविष्य में बनाये रखना सभी की जिम्मेवारी है।
नरेंद्र कुमार ने बीडब्ल्यूजी श्रेणी के संदर्भ में कहा कि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों को ठोस कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करना होगा। ऐसे संस्थान जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक, पानी की खपत प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक या ठोस कचरा उत्पादन प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक है, वे बीडब्ल्यूजी की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि बड़े मॉल, अस्पताल, स्कूल, होटल, हाउसिंग सोसायटी, फैक्ट्री आदि इसके दायरे में आ सकते हैं। ऐसे संस्थानों को प्रतिदिन कितना कचरा उत्पन्न हुआ तथा उसका कितना निस्तारण या प्रसंस्करण किया गया, इसका रिकॉर्ड रखना होगा। कचरे का पृथक्करण नहीं करने या कचरे को खुले में अथवा इधर-उधर फेंकने पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जा सकता है।
चार डिब्बों में अलग-अलग किया जाए कचरे का संग्रहण
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि फोर-वे सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाए। प्रथम श्रेणी हरा डिब्बा में गीला कचरा जैसे खाना, सब्जी-फल के छिलके, चाय की पत्ती, फूल-पत्तियां आदि गीले कचरे में शामिल हैं। इससे खाद एवं कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। दूसरी श्रेणी में नीला डिब्बा में सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कागज, कांच, लोहा, कपड़ा, टेट्रा पैक आदि सूखे कचरे में आते हैं। इस कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। तीसरी श्रेणी काला डिब्बा में खतरनाक कचरा जैसे बैटरी, दवाइयां, पेंट, कीटनाशक, सीएफएल बल्ब आदि ऐसे कचरे में शामिल हैं, जिनके निस्तारण के लिए विशेष व्यवस्था जरूरी है। चौथी श्रेणी लाल डिब्बा में सैनिटरी कचरा जैसे सैनिटरी पैड, डायपर, मास्क, दस्ताने, बैंडेज आदि सैनिटरी कचरे में आते हैं। इनका नियमानुसार सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा।
नरेंद्र कुमार ने कहा कि स्वच्छता केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक संस्था की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सरपंचों का आह्वान किया कि वे अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में स्वच्छता गतिविधियों की नियमित निगरानी करें तथा ग्रामीणों को कचरा पृथक्करण और उचित निस्तारण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि जिला रोहतक ने स्वच्छता के क्षेत्र में जो ताज हासिल किया है, उसे हमेशा बनाए रखना है। इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन को मिलकर निरंतर प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर महम एवं रोहतक खंड के सरपंच तथा संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


