कविता.रोहतक: पीजीआईएमएस में अल्ट्रासाउंड करवाना मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ रोजाना सैकड़ों मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक दिन में करीब 40 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पा रहा है।
ऐसे में मरीजों की वेटिंग लगातार बढ़ रही है। सुबह 7-8 बजे लाइन में लगने के बाद शाम तक नंबर आने की स्थिति है। दिन में डॉक्टर को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने पहुंचने वाले मरीजों के लिए उसी दिन जांच होना लगभग नामुमकिन है। सवाल यह है कि जब मरीजों की संख्या और जरूरत इतनी अधिक है तो पीजीआई में अल्ट्रासाउंड की क्षमता बढ़ाने की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो पाई।
लंबी वेटिंग से परेशान मरीजों का गुस्सा फूट पड़ा
वहीं मंगलवार को अल्ट्रासाउंड की लंबी वेटिंग से परेशान मरीजों का गुस्सा फूट पड़ा। अल्ट्रासाउंड न होने पर मरीज और उनके परिजन हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. एचके अग्रवाल के कार्यालय पहुंच गए और नारेबाजी की। मरीजों का आरोप लगाया 40 अल्ट्रासाउंड के बाद बाकी मरीजों को वापस भेज दिया जाता है।
40 की क्षमता, मरीज सैकड़ों
पीजीआईएमएस में अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों की संख्या लगातार अधिक रहती है, लेकिन एक दिन में करीब 40 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। मरीजों की संख्या सैकड़ों में होने के कारण सभी मरीजों की जांच एक दिन में नहीं हो पाती। यही वजह है कि अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को कई दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इतने बड़े अस्पताल में जांच की मांग और उपलब्ध क्षमता के बीच यह अंतर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
सुबह 7-8 बजे लाइन, शाम तक इंतजार
अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों को सुबह 7 या 8 बजे अस्पताल पहुंचकर लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद घंटों कतार में खड़े रहने के बाद शाम तक उनका नंबर आता है। जो मरीज दिन में डॉक्टर को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने पहुंचते हैं, उनके लिए उसी दिन जांच होना लगभग नामुमकिन हो जाता है। कई मरीजों को अगले दिन या बाद की तारीख में दोबारा अस्पताल आना पड़ता है।
जांच की जरूरत आज, नंबर कई दिन बाद
अल्ट्रासाउंड कई मरीजों के इलाज और बीमारी की पहचान के लिए जरूरी जांच है। डॉक्टर की सलाह के बाद जब मरीज जांच के लिए पहुंचता है तो उसे तत्काल जांच नहीं मिल पाती। सीमित संख्या में अल्ट्रासाउंड होने के कारण वेटिंग बढ़ती जाती है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाना बड़ी परेशानी बन रहा है।
डॉक्टर पर्याप्त, फिर अल्ट्रासाउंड में क्यों परेशानी
मरीजों का सवाल है कि पीजीआई में डॉक्टरों की संख्या और सुविधाएं होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था में लंबे समय से सुधार क्यों नहीं हो पा रहा। पुरानी बिल्डिंग में रोजाना लाइन और मरीजों की भीड़ दिखाई देती है। अगर मरीजों की संख्या अस्पताल की मौजूदा क्षमता से कई गुना अधिक है तो अतिरिक्त मशीन, स्टाफ या दूसरी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही, यह सवाल लगातार उठ रहा है।
पीपीपी मोड: समय पर जांच, पीजीआई में लंबी वेटिंग
मरीजों का कहना है कि पीपीपी मोड पर संचालित व्यवस्था में डॉक्टरों की संख्या कम होने के बावजूद जांच अपेक्षाकृत समय पर हो जाती है। इसके मुकाबले पीजीआई जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि मरीजों की संख्या के हिसाब से अल्ट्रासाउंड की क्षमता कब बढ़ाई जाएगी और कब ऐसी व्यवस्था बनेगी कि मरीज को सुबह से शाम तक लाइन में लगने के बावजूद जांच के लिए दोबारा अस्पताल न आना पड़े।


