- बरसात और कूड़े ने बढ़ाया संक्रमण का खतरा
- पिछले 15 दिनों में पीजीआई में स्किन, पीलिया और पेट दर्द के मरीजों में करीब 5 प्रतिशत बढ़ोतरी
कविता.रोहतक: नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच रोहतक इन दिनों गंदगी के संकट से जूझ रहा है। शहर की सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। इसी बीच हुई बरसात ने हालात को और बिगाड़ दिया। सड़कों पर जमा बरसाती पानी कूड़े के संपर्क में आने के बाद और खतरनाक होगया, कूड़ा भी पानी के साथ सड़कों पर फैल गया। ऐसे में लोगों को गंदे पानी और कूड़े के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
इस गंदगी का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। पीजीआई में पिछले करीब 15 दिनों के दौरान स्किन, पीलिया और पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
वहीं पिछले चार दिनों से पीजीआई और सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 8 से 10 नए मरीज स्किन, पीलिया और पेट दर्द जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में भी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कूड़ा सड़ता रहा, बरसात ने फैलाया संक्रमण का खतरा
सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कूड़ा कई दिनों तक पड़ा रह रहा है। बरसात के पानी से कूड़ा गीला होने के बाद उसमें सड़न शुरू हो जाती है। इससे दुर्गंध के साथ मक्खी-मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। यही नहीं, कूड़े के संपर्क में आया पानी अगर नालियों या अन्य रास्तों से लोगों के आसपास जमा हो जाए तो संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सड़क पर पानी और कूड़ा, राहगीरों की मजबूरी
बरसात के बाद कई इलाकों में सड़कें जलभराव की चपेट में आ गईं। जिन स्थानों पर पहले से कूड़े के ढेर लगे थे, वहां पानी भरने के बाद कूड़ा फैलकर सड़क तक पहुंच गया। वाहन चालकों के गुजरने पर गंदा पानी लोगों के कपड़ों और शरीर पर पड़ रहा है। पैदल चलने वालों की परेशानी इससे भी ज्यादा है। कई लोगों को मजबूरी में गंदे पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है
कूड़े के साथ बरसाती पानी बना दोहरी मुसीबत
बरसात में सामान्य कूड़ा भी लोगों के लिए ज्यादा परेशानी खड़ी कर सकता है। गीला कूड़ा सड़ने लगता है और उसमें मौजूद गंदगी पानी में मिल सकती है। यही पानी जब सड़क, गली या लोगों के घरों के आसपास जमा होता है तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है जो लंबे समय तक इस पानी के संपर्क में रहते हैं।
कूड़े के ढेर पर मक्खियां, मच्छर और लावारिस पशु

कई दिनों तक उठान नहीं होने से कूड़े के ढेर पर मक्खियों और लावारिस पशुओं का जमावड़ा भी बढ़ रहा है। मक्खियां कूड़े से संक्रमणकारी तत्वों को भोजन तक पहुंचा सकती हैं। वहीं बरसात के बाद जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। इससे मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
गंदगी और बरसात में कौन-कौन सी बीमारियां बढ़ सकती हैं
- स्किन इंफेक्शन: गंदे पानी और कूड़े के संपर्क से खुजली, लाल चकत्ते, फंगल इंफेक्शन और त्वचा में जलन की समस्या हो सकती है।
- पेट का संक्रमण: दूषित पानी या दूषित खाद्य पदार्थों के कारण दस्त, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है।
- पीलिया: दूषित पानी और खराब स्वच्छता से हेपेटाइटिस-ए और ई जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
- डेंगू-मलेरिया: जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बन सकता है।
- टाइफाइड: दूषित पानी और भोजन इसके संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
- आंखों का संक्रमण: गंदे पानी के संपर्क में आने से आंखों में जलन और संक्रमण की समस्या हो सकती है।
बीमारी से बचने के लिए क्या करें
- गंदे बरसाती पानी में जाने से जहां तक संभव हो बचें।
- अगर पैर गंदे पानी में चले जाएं तो साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
- खुले में रखे या दूषित पानी के संपर्क में आए भोजन का इस्तेमाल न करें।
- केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
- बच्चों को कूड़े के ढेर और जमा पानी से दूर रखें।
- त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या संक्रमण दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लें।
- लगातार पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार या आंखों/त्वचा में पीलापन होने पर जांच कराएं।
हड़ताल लंबी चली तो शहर के सामने और बड़ा संकट
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचती है तो शहर का क्या होगा। रोजाना निकलने वाला कूड़ा लगातार जमा होता रहेगा और आने वाले दिनों में बरसात हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कूड़े के ढेर बढ़ने के साथ दुर्गंध, मच्छर-मक्खियों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ेगा। ऐसे में यह सिर्फ सफाई व्यवस्था का संकट नहीं रह जाता, बल्कि शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है।
रोहतक के लोगों की नजर अब नगर निगम और प्रशासन पर है कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समाधान कब होता है और शहर को कूड़े के इस संकट से कब राहत मिलती है।


