- मोटे मुनाफे, आसान निवेश और नौकरी के ऑफर दिखाकर लोगों को जाल में फंसा रहे अपराधी
- पिछले दिनों जिले में सामने आए कई मामले
कविता.रोहतक : इंटरनेट पर दिखाई देने वाले आकर्षक विज्ञापन अब केवल कारोबार बढ़ाने का माध्यम नहीं रह गए हैं। साइबर अपराधी इन्हीं विज्ञापनों का सहारा लेकर लोगों तक पहुंच बना रहे हैं और उन्हें मोटे मुनाफे, सुरक्षित निवेश, घर बैठे कमाई या अन्य लुभावने ऑफर देकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। पहले सोशल मीडिया या वेबसाइट पर विज्ञापन दिखाया जाता है, फिर व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए संपर्क कर विश्वास बनाया जाता है और आखिर में अलग-अलग बहाने बनाकर रकम खाते में ट्रांसफर करा ली जाती है।
पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों जिले में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें पीड़ित इंटरनेट पर दिखे विज्ञापनों या उनके जरिए मिले संपर्क के कारण साइबर ठगी का शिकार बने। अलग-अलग मामलों में लोगों ने लाखों रुपये गंवा दिए। जांच में सामने आया कि अपराधी हर बार नया तरीका अपनाते हैं, लेकिन उनका मकसद एक ही होता है—लोगों को लालच और भरोसे में लेकर पैसा हड़पना।
रियल एस्टेट निवेश के नाम पर बनाई कहानी
पिछले दिनों सामने आए एक मामले में शहर के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने इंटरनेट पर रियल एस्टेट में निवेश से जुड़ा विज्ञापन देखा। विज्ञापन में कम समय में बेहतर रिटर्न का दावा किया गया था। संपर्क करने पर खुद को निवेश सलाहकार बताने वाले लोगों ने उन्हें भरोसे में लिया और चरणबद्ध तरीके से राशि जमा कराई। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक उसके खाते से 3.65 लाख रुपये निकल चुके थे। बाद में न तो वादा पूरा हुआ और न ही आरोपियों से संपर्क हो सका।
फर्जी कॉल और नकली भुगतान संदेश से लगाया चूना
एक अन्य मामले में साइबर ठग ने खुद को परिचित बताकर फोन किया और भरोसा जीतने के लिए फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट भेज दिया। पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि राशि उसके खाते में भेज दी गई है और तकनीकी कारणों से उसे पहले कुछ रकम ट्रांसफर करनी होगी। भरोसा करने पर पीड़ित ने करीब 40 हजार रुपये भेज दिए। बाद में बैंक खाते की जांच करने पर पता चला कि भेजा गया भुगतान संदेश पूरी तरह फर्जी था।
छात्र को निवेश का लालच देकर खाते से निकाले रुपये
जिले में सामने आए एक और मामले में एक छात्र सोशल मीडिया पर दिखे निवेश संबंधी विज्ञापन के झांसे में आ गया। शुरुआत में छोटी राशि निवेश करने पर अधिक मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा जीता गया। इसके बाद सिक्योरिटी फीस, प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर लगातार पैसे जमा कराए गए। जब छात्र ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने संपर्क खत्म कर दिया। इस ठगी में उसे 91 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
हर दिन बदल रहे हैं साइबर अपराधियों के तरीके
पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधी लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। पहले जहां फर्जी बैंक कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक होते थे, वहीं अब इंटरनेट पर आकर्षक विज्ञापन, निवेश योजनाएं, नौकरी के ऑफर और ऑनलाइन कमाई के दावे लोगों को निशाना बनाने का नया माध्यम बन चुके हैं। अपराधी छोटी रकम पर नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा जीतते हैं और फिर बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं। इसी वजह से इंटरनेट पर दिखने वाले हर ऑफर की सत्यता जांचना जरूरी है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी भी निवेश, नौकरी या कमाई के विज्ञापन पर बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और न ही किसी लिंक पर क्लिक करके अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करें। यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें। समय रहते शिकायत करने पर ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

