Monday, May 4, 2026
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जहां बजनी थी तालियां, वहां खड़ी हैं गाड़ियां, श्री राम रंगशाला पर नगर निगम का कब्जा

  • 5 करोड़ की रंगशाला बनी ‘कबाड़शाला’, कलाकार बाहर, निगम अंदर
  • प्रशासन की बेरुखी से कलाकारों का मंच छिना

रोहतक : जिस रंगशाला में कभी रोशनी, तालियां और कलाकारों की आवाज़ गूंजती थी, आज वहां धूल, सन्नाटा और नगर निगम की गाड़ियों का कब्जा है। मानसरोवर पार्क के पास बनी श्री राम रंगशाला अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है।

कलाकारों के लिए बने इस ओपन एयर थिएटर को अब नगर निगम अपने दफ्तर और पार्किंग स्थल की तरह इस्तेमाल कर रहा है। 2013 में ओपन थिएटर बनना शुरू हुआ और 2016 में उद्घाटन के साथ तैयार हुई इस जगह पर 5 करोड़ से अधिक खर्च हुए थे, लेकिन आज इसकी हालत ‘कबाड़शाला’ जैसी हो गई है। मंच जहां कला का प्रदर्शन होना था, वहां अब प्रशासनिक उपयोग हावी है और कलाकार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

मंच से मशीनी शोर तक

कभी यहां वीकेंड नाइट्स में संगीत, नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती थी। स्थानीय कलाकारों को खुला मंच मिलता था, दर्शकों की भीड़ उमड़ती थी और रोहतक की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती थी। आज उसी मंच के आसपास नगर निगम की गाड़ियां खड़ी हैं और कला की जगह गाड़ियों के शोर ने ले ली है। कलाकारों के लिए बना मंच अब प्रशासनिक जरूरतों का साधन बन गया है।

करोड़ों का सपना, फाइलों में गुम

श्री राम रंगशाला का निर्माण बड़े विजन के साथ हुआ था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस थिएटर में एलईडी वॉल, प्रोजेक्टर, लाइट पिलर, ड्रेसिंग रूम, एसी सिस्टम, 100 केवी डीजी बैकअप और 1200 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था बनाई गई थी। लेकिन रखरखाव के अभाव में ये सुविधाएं अब या तो खराब हो चुकी हैं या इस्तेमाल ही नहीं हो रहीं। करोड़ों का यह प्रोजेक्ट आज फाइलों में ही सफल दिखता है, जमीन पर नहीं।

जब रंगशाला में खुली ओपीडी

प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ साल पहले यहां एक प्राइवेट अस्पताल की ओपीडी तक शुरू कर दी गई थी। कलाकारों ने इसका विरोध किया, प्रदर्शन हुए, तब जाकर ओपीडी बंद हुई। लेकिन सवाल अब भी वही है, क्या रंगशाला का उपयोग ऐसे ही अस्थायी प्रयोगों के लिए होता रहेगा।

 रंगशाला बनी ‘कबाड़शाला’,
रंगशाला बनी ‘कबाड़शाला’,

नगर निगम ही बना ‘कलाकार’

विडंबना यह है कि अब रंगशाला में नगर निगम का ही प्रदर्शन चल रहा है। ऊपर की बिल्डिंग में निगम का कार्यालय है, और पूरा परिसर उनके काम में लिया जा रहा है।
कलाकारों का कहना है कि अब यहां असली कलाकार नहीं, नगर निगम ही कलाकार बन गया है, जो अपने हिसाब से मंच का इस्तेमाल कर रहा है।

आवाज उठी, लेकिन सुनवाई नहीं

स्थानीय कलाकार कई बार लिखित में प्रशासन को शिकायत दे चुके हैं। उन्होंने मांग की कि रंगशाला को उसके मूल उद्देश्य, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए ही इस्तेमाल किया जाए। लेकिन हर बार उनकी आवाज़ अनसुनी रह गई। न कोई ठोस योजना बनी, न ही रखरखाव की दिशा में कोई कदम उठाया गया।

राजनीतिक शिलान्यास, प्रशासनिक उपेक्षा

6 दिसंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस ओपन एयर थिएटर का शिलान्यास किया था। 15 जुलाई 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसका उद्घाटन किया। शुरुआत में यह नगर निगम के मास्टर प्लान का अहम हिस्सा था, लेकिन समय के साथ यह योजना प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गई।

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