अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और लापरवाही ने छीनी सड़क की सांस, रोज फंस रहे लोग
गरिमा टाइम्स न्यूज.रोहतक : शहर की धड़कन माने जाने वाले अशोका चौक से पुरानी आईटीआई तक का रास्ता अब लोगों के लिए राहत नहीं, रोज की परेशानी बन चुका है। यहां ट्रैफिक जाम अब एक आम दृश्य नहीं बल्कि रोज की परीक्षा बन गया है।
हालात ऐसे हैं कि 100 मीटर की दूरी तय करने में भी 20 से 30 मिनट का वक्त लग रहा है। सुबह दफ्तर जाने वालों से लेकर शाम को घर लौटने वाले लोगों तक, हर कोई इस जाम के जंजाल में फंसा नजर आता है। सड़क पर बढ़ता अतिक्रमण और मनमानी पार्किंग इस समस्या की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है।
सड़क सिकुड़ी, मुसीबत बढ़ी
अशोका चौक की यह सड़क कभी 90 फीट चौड़ी मानी जाती थी, लेकिन आज हालात यह हैं कि यह मुश्किल से 40 फीट तक सिमट गई है। कारण साफ है, दुकानों का फैलाव और सड़क किनारे कब्जा। सड़क की चौड़ाई घटने से ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है, जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है।
दुकानें सड़क पर, रास्ता गायब
मार्ग के दोनों तरफ दुकानदारों ने अपने कारोबार को सड़क तक फैला दिया है। सामान दुकान के अंदर कम और सड़क पर ज्यादा नजर आता है। ऐसे में पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बचती और वाहन चालकों को संकरी जगह में रास्ता निकालना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
पार्किंग है, पर इस्तेमाल नहीं
सबसे हैरानी की बात यह है कि इलाके में पार्किंग की व्यवस्था होने के बावजूद लोग अपने वाहन सड़क किनारे ही खड़े कर देते हैं। इससे सड़क का बड़ा हिस्सा यूं ही घिर जाता है। जब दोनों तरफ वाहन खड़े हों और बीच में ट्रैफिक चले, तो जाम लगना तय है।
इमरजेंसी सेवाएं भी बेबस
इस जाम का असर केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है। कई बार एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवाएं भी इस जाम में फंस जाती हैं। सोचने वाली बात है कि अगर किसी की जान पर बन आए, तो यह जाम कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
नियमों की अनदेखी, सिस्टम कमजोर
सड़क किनारे बनाई गई सेफ्टी पट्टी अब केवल नाम की रह गई है। लोग बेधड़क वहां वाहन पार्क कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा। कार्रवाई होती भी है, तो कुछ समय बाद हालात फिर वैसे ही हो जाते हैं।
लोगों का फूटा गुस्सा
इस रास्ते से रोज गुजरने वाले लोग अब खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन केवल दिखावे के लिए अभियान चलाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। बार-बार शिकायत के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
समाधान की राह
अगर प्रशासन सख्ती के साथ लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करे, नो पार्किंग नियमों को लागू करे और वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था को मजबूती दे, तो इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।

