रोहतक : शहर में इन दिनों बंदरों का ऐसा आतंक है कि लोगों का घर से निकलना तो दूर, छत पर जाना भी मुश्किल हो गया है।
सेक्टरों से लेकर कॉलोनियों तक बंदरों के झुंड बेखौफ घूम रहे हैं। मौका मिलते ही घर में घुसना, सामान उठाना और विरोध करने पर काटने को दौड़ना, मानो शहर में इनका ही राज चल रहा हो। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है। अभिभावक उन्हें छतों और गलियों में अकेले भेजने से डर रहे हैं।
छत बनी नो एंट्री जोन, बच्चों की मस्ती पर बंदरों का पहरा
पहले जिस छत पर बच्चे शाम होते ही खेलने पहुंच जाते थे, अब वहां जाने से पहले घरवाले कई बार इधर-उधर देखकर तसल्ली करते हैं। लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड अचानक छतों पर पहुंच जाते हैं। बच्चे उन्हें देखकर डरकर कमरे में भागते हैं। कई परिवारों ने तो बच्चों को अकेले छत पर भेजना ही बंद कर दिया है। डर यह भी है कि बंदर पीछा करते हुए बच्चे को काट न लें।
डीएलएफ कॉलोनी में महिला को काटा, दहशत और बढ़ी
एक दिन पहले डीएलएफ कॉलोनी में बंदर ने एक महिला को काट लिया। इस घटना के बाद इलाके के लोगों में खासा डर है। लोगों का कहना है कि बंदरों का झुंड अचानक हमला करने की मुद्रा में आ जाता है और उन्हें भगाना आसान नहीं होता। महिला के साथ हुई घटना ने लोगों की उस चिंता को और गहरा कर दिया है कि अगर बंदर बच्चों पर झपट पड़े तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
घर में घुसते हैं, सामान उठाते हैं और फिर छत से फरार
बंदरों की शरारत अब सिर्फ गलियों और पेड़ों तक सीमित नहीं है। लोगों के मुताबिक, मौका मिलते ही बंदर घरों में घुस जाते हैं और खाने-पीने की चीजों से लेकर छोटे-मोटे सामान तक उठाकर ले जाते हैं। कोई उन्हें रोकने की कोशिश करे तो बंदर दांत दिखाकर डराने लगते हैं। कई बार सामान छत या पड़ोसी की छत पर ले जाकर बैठ जाते हैं। यानी शहरवासियों के घरों में भी अब बंदरों की अघोषित एंट्री हो गई है।
सेक्टरों में झुंड देखकर बदल लेते हैं रास्ता
शहर के कई सेक्टरों में लोगों को बंदरों के झुंड के कारण रास्ता बदलना पड़ रहा है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा सतर्क हैं। लोग हाथ में सामान लेकर चलते समय भी आसपास नजर रखते हैं। डर इस बात का है कि कहीं बंदर अचानक पीछे से न आ जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या लगातार बढ़ रही है और अब केवल बंदरों को भगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इनके नियंत्रण के लिए प्रभावी अभियान चलाने की जरूरत है।
बंदरों का डर खत्म करो
शहरवासियों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा है। अभिभावक चाहते हैं कि संबंधित विभाग बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चलाएं। लोगों का कहना है कि शहर में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए कि बच्चे अपने ही घर की छत पर जाने से डरें। बंदरों का उत्पात अब महज शरारत नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है। लोगों को इंतजार है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे और रोहतक की छतों से बंदरों का कब्जा कब हटेगा।


