- भैंस का दूध 100, गाय का 80 रुपये लीटर; घी 1500 रुपये किलो और छाछ 20 रुपये लीटर
- नियम तोड़ा तो पहली बार 5100 और दूसरी बार 11000 रुपये जुर्माना
- राजथल से शुरू हुई दूध के भाव बढ़ाने की चर्चा
कविता.रोहतक : हरियाणा के गांवों में दूध के भाव को लेकर एक नई हलचल शुरू होती दिखाई दे रही है। हिसार के गांव राजथल में हुई पशुपालकों की बैठक में दूध और दुग्ध उत्पादों के नए रेट तय करने का फैसला लिया गया है। बैठक में पशुपालकों ने भैंस का दूध 100 रुपये लीटर और गाय का दूध 80 रुपये लीटर बेचने पर सहमति जताई। अब इस फैसले की चर्चा आसपास के गांवों में भी होने लगी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दूसरे गांवों में भी इसी तरह के सामूहिक फैसले सामने आ सकते हैं।
दूध के साथ घी और छाछ के भी रेट तय
राजथल में सिर्फ दूध के दाम बढ़ाने की बात नहीं हुई, बल्कि घी और छाछ के रेट भी तय किए गए हैं। पशुपालकों के अनुसार घी 1500 रुपये किलो और छाछ 20 रुपये लीटर में बेची जाएगी। बैठक में यह भी साफ किया गया कि अब छाछ मुफ्त में देने की व्यवस्था नहीं रहेगी। यानी दूध के साथ मिलने वाले अन्य उत्पादों की कीमत भी पशुपालकों की मेहनत और लागत को ध्यान में रखकर तय करने की कोशिश की गई है।
पशुपालकों का तर्क, लागत लगातार बढ़ रही
पशुपालकों का कहना है कि पशु पालना अब पहले जैसा आसान काम नहीं रह गया है। पशुओं के चारे से लेकर दवाइयों, रखरखाव और देखभाल तक पर खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में दूध का मौजूदा भाव उनके लिए पर्याप्त नहीं रह जाता। इसी वजह से गांव स्तर पर पशुपालक अपने उत्पादों का भाव सामूहिक रूप से तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राजथल की बैठक को इसी बदलती सोच की एक अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
नियम तोड़ा तो जेब पर पड़ेगा भारी असर
बैठक में रेट से जुड़े फैसले को लागू कराने के लिए जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। तय नियमों का उल्लंघन करने वाले पशुपालक पर पहली बार 5100 रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। अगर वही व्यक्ति दूसरी बार नियम तोड़ता है तो जुर्माने की राशि बढ़कर 11000 रुपये हो जाएगी। इससे साफ है कि पशुपालक सिर्फ रेट तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सामूहिक निर्णय को लागू कराने के लिए अनुशासन भी कायम रखना चाहते हैं।
क्या दूसरे गांव भी अपनाएंगे यही मॉडल
राजथल के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हरियाणा के दूसरे गांव भी दूध के लिए इसी तरह सामूहिक रेट तय करेंगे। गांवों में पशुपालकों के बीच अगर इस मुद्दे पर सहमति बनती है तो धीरे-धीरे कई गांव अपने स्तर पर दूध और दुग्ध उत्पादों के भाव निर्धारित कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दूध के कारोबार का तरीका बदलने की संभावना भी बन सकती है।
ग्राहकों की जेब पर कितना पड़ेगा असर
अगर भैंस के दूध का भाव 100 रुपये और गाय के दूध का भाव 80 रुपये लीटर तक पहुंचता है तो इसका सीधा असर दूध खरीदने वाले परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ना तय है। खासकर उन परिवारों के लिए, जो रोजाना कई लीटर दूध खरीदते हैं। दूसरी तरफ पशुपालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के दौर में उन्हें अपने दूध का उचित मूल्य मिलना भी जरूरी है। ऐसे में आने वाले दिनों में पशुपालकों और ग्राहकों के बीच कीमत को लेकर बहस तेज हो सकती है।
एक गांव का फैसला, बड़े बदलाव की शुरुआत
राजथल में हुई बैठक फिलहाल एक गांव के पशुपालकों का सामूहिक फैसला है, लेकिन इसकी गूंज दूसरे गांवों तक पहुंचने लगी है। अगर अन्य गांव भी इसी तरह दूध के रेट तय करने लगे तो हरियाणा में दूध के बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल नजर इस बात पर है कि राजथल के बाद कितने गांव इस मॉडल को अपनाते हैं और दूध के नए रेट को लेकर पशुपालकों की यह मुहिम कितनी दूर तक जाती है।


