रोहतक : उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि पराली एवं कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में पराली और कचरा जलाने की घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए प्रभावी निगरानी, व्यापक जन-जागरूकता तथा नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उपायुक्त ने यह निर्देश महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के राधाकृष्णन ऑडिटोरियम में आयोजित भुवन एप एवं सीआरएम एप स्टाफ ट्रेनिंग कैंप के दौरान अधिकारियों एवं संबंधित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि जिले में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। पराली जलाने अथवा सड़कों, सार्वजनिक स्थानों व डंपिंग यार्ड में कचरे को आग लगाने की घटनाओं पर संबंधित पर्यावरणीय एवं कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि एसडीएम, पुलिस बल, संबंधित विभागों के अधिकारी एवं फील्ड टीमें लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करें। विशेष रूप से देर शाम और तड़के सुबह निगरानी एवं गश्त बढ़ाई जाए, क्योंकि इस दौरान पराली एवं कचरा जलाने की घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

उपायुक्त ने जिले के 13 चिन्हित ‘येलो जोन’ गांवों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गांवों में संबंधित टीमें किसानों एवं ग्रामीणों से निरंतर संपर्क बनाए रखें तथा आगजनी की किसी भी घटना को समय रहते रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। उन्होंने ग्राम स्तर पर गठित टीमों में शामिल सरपंच, नंबरदार और चौकीदार को भी अपने-अपने क्षेत्र में पराली एवं कचरा जलाने की घटनाओं की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करते हुए स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए।
फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक साधनों का करें उपयोग
उपायुक्त सतबीर सिंह ने किसानों से आह्वान किया कि वे पराली को आग लगाने के बजाय फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाएं। किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), सुपर सीडर आदि सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के साथ संबंधित किसान की भूमि में ‘रेड एंट्री’ दर्ज किए जाने का प्रावधान है, जिसका प्रभाव सरकारी पोर्टल पर फसल बिक्री की सुविधा पर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को इस संबंध में पहले से जागरूक किया जाए, ताकि वे पराली जलाने के बजाय उपलब्ध वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करें। उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि पराली और कचरा जलाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाए, किसानों के साथ बैठकें आयोजित की जाएं तथा स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों को धुएं से होने वाले स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए।
एसडीएम आशीष कुमार ने भी प्रदूषण की रोकथाम एवं फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फील्ड स्तर पर प्रभावी निगरानी, समय पर सूचना उपलब्ध करवाने तथा संबंधित एप के माध्यम से सूचनाओं की रिपोर्टिंग एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
उपायुक्त ने प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी का प्रभावी ढंग से उपयोग करें और फील्ड में पराली एवं कचरा जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आपसी समन्वय से कार्य करें। प्रशिक्षण शिविर में अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार सांपला की एसडीएम अंकिता पुवार, रोहतक के एसडीएम आशीष कुमार, महम के एसडीएम विपिन कुमार शर्मा व कृषि विभाग के उपनिदेशक सुरेंद्र मलिक आदि मौजूद थे।

