Monday, November 2, 2026
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तपती गर्मी में ‘सर्दी’ जैसा हमला, अस्पतालों में बढ़े वायरल के मरीज

कविता. रोहतक : जून की तपती गर्मी में जहां लोग लू और डिहाइड्रेशन से बचने की चिंता कर रहे हैं, वहीं इस बार सर्दियों में दिखने वाला कोल्ड वायरल लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। शहर के अस्पतालों में खांसी, जुकाम, गले में खराश, बुखार और कफ की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में इस तरह के मामले पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में नहीं देखे गए।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एसी और कूलर की ठंडी हवा, तेज धूप से अचानक ठंडे माहौल में पहुंचना और ठंडे पेय पदार्थों का बढ़ता चलन लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। यही वजह है कि वायरल संक्रमण अपेक्षा से अधिक समय तक लोगों को परेशान कर रहा है।

एसी-कूलर का बढ़ता इस्तेमाल बना कारण

भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लोग दिनभर एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार पसीने से भीगे शरीर के साथ सीधे ठंडी हवा में बैठने से शरीर का तापमान अचानक बदल जाता है। इससे गले और श्वसन तंत्र पर असर पड़ता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

खांसी ठीक होने का नाम नहीं ले रही

इस बार वायरल संक्रमण का सबसे बड़ा असर खांसी और कफ के रूप में दिखाई दे रहा है। कई मरीजों में बुखार और जुकाम तो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कफ और गले की परेशानी दो सप्ताह तक बनी रहती है। यही वजह है कि मरीज बार-बार अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।

पेट की बीमारियां भी बढ़ीं

कोल्ड वायरल के साथ कई मरीज उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत भी लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि गर्मी में खान-पान में बरती जा रही लापरवाही और दूषित पानी भी बीमारियों को बढ़ा रहा है। टायफाइड के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

बच्चों-बुजुर्गों पर मार

संक्रमण का असर सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों में देखने को मिल रहा है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि बीमारी गंभीर रूप न ले सके।

मौसम का मिजाज बिगाड़ रहा सेहत

दिन में 45 डिग्री के आसपास तापमान और रात में अपेक्षाकृत ठंडा मौसम शरीर को बार-बार चुनौती दे रहा है। मौसम में हो रहे इस बदलाव के कारण शरीर संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहा है। विशेषज्ञ इसे मौसमी संक्रमण के बढ़ने का प्रमुख कारण मान रहे हैं।

राहत के लिए बरतें ये सावधानियां

डॉक्टरों की सलाह है कि लोग पर्याप्त पानी पिएं, ताजा भोजन करें और कटे हुए फल या खुले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। एसी का तापमान बहुत कम न रखें और पसीने में तुरंत ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचें। बीमारी के लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहेगा।

‘गर्मी के मौसम में वायरल संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अधिकांश मरीज एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन खांसी और कफ की शिकायत लंबे समय तक बनी रहती है। मौसम के बदलाव और ठंडी चीजों के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। –डॉ. रोहित, सिविल अस्पताल

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